पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव में मिली करारी हार के बाद इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया। इसके तुरंत बाद, राज्यपाल ने संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया और मौजूदा विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया।

इस्तीफे पर अड़ी रहीं ममता, राज्यपाल का एक्शन
2021 से अस्तित्व में रही विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी ममता बनर्जी ने यह कहते हुए पद छोड़ने से मना कर दिया कि यह चुनाव परिणाम ‘जनादेश नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 100 सीटों पर जनादेश को लूटा गया और चुनाव आयोग ने बीजेपी के पक्ष में काम किया। राज्यपाल के आदेश के बाद अब उन्हें औपचारिक इस्तीफे की आवश्यकता नहीं रह गई है।
बता दें, पद से हटने के बाद ममता बनर्जी ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा, “मैं हारी नहीं हूं, संघर्ष करने वाली हूं। अब मैं एक आजाद पंछी हूं और सड़कों पर उतरकर अत्याचार के खिलाफ लड़ूंगी।” उन्होंने यह भी साफ किया कि अब वह राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित गठबंधन के कई नेताओं ने उनसे फोन पर बात कर एकजुटता जताई है।



