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ईरान को हथियार देने वालों की खैर नहीं, अमेरिका ने 10 कंपनियों पर लगाया बैन

ईरान को हथियार सप्लाई करने वाली इंटरनेशनल कंपनियों के खिलाफ अमेरिका ने सख्त एक्शन लिया है. जानकारी के अनुसार US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 10 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए. इनमें चीन और हांगकांग में मौजूद कंपनियां भी शामिल हैं. इन पर आरोप है कि इन्होंने ईरान की सेना को हथियार और कच्चा माल खरीदने में मदद की, जिनका इस्तेमाल ईरान के ‘शाहिद ड्रोन प्रोग्राम’ में होता है. अपने बयान में, ट्रेजरी ने कहा कि वह ईरान के सैन्यऔद्योगिक नेटवर्क के खिलाफ और आर्थिक कदम उठाने के लिए तैयार है. इसका मकसद तेहरान को अपनी उत्पादन क्षमता फिर से बनाने और अपनी सीमाओं से बाहर अपना प्रभाव बढ़ाने से रोकना है. उसने यह भी चेतावनी दी कि जो विदेशी कंपनियां और वित्तीय संस्थान ईरान के अवैध व्यापार में मदद कर रहे हैं, उन्हें और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. इनमें चीन की स्वतंत्र “टीपॉट” तेल रिफाइनरियों से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं.

ईरान को हथियार देने वालों की खैर नहीं, अमेरिका ने 10 कंपनियों पर लगाया बैन
ईरान को हथियार देने वालों की खैर नहीं, अमेरिका ने 10 कंपनियों पर लगाया बैन

इन कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध

US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि प्रशासन उन विदेशी कंपनियों को निशाना बनाना जारी रखेगा जो ईरान की सेना को सप्लाई करती हैं. उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में, वाशिंगटन “अमेरिका को सुरक्षित रखने” और US सेना के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों के प्रवाह को रोकने के लिए कदम उठाएगा. जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें चीन की Yushita Shanghai International Trade Co Ltd, दुबई की Elite Energy FZCO, हांगकांग की HK Hesin Industry Co Ltd और Mustad Ltd, बेलारूस की Armory Alliance LLC, ईरान की Pishgam Electronic Safeh Co, और चीन की Hitex Insulation Ningbo Co Ltd, आदि शामिल हैं. यह कदम US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे से कुछ ही दिन पहले उठाया गया है. इस दौरे पर ट्रंप, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत करने वाले हैं. साथ ही, यह कदम ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों के बीच आया है, जो फिलहाल रुके हुए हैं.

हर महीने 10 हजार ड्रोन बनाता है ईरान

अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का मकसद ईरान की उस क्षमता को बाधित करना है, जिससे वह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में समुद्री सुरक्षा को खतरा पहुंचा सकता है. यह एक महत्वपूर्ण ग्लोबल एनर्जी कोरिडोर है, जहां इस साल की शुरुआत में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद से कई बार रुकावटें आई हैं. UK द्वारा फंडिंग ‘सेंटर फॉर इंफॉर्मेशन रेजिलियंस’ के अनुसार, ईरान एक प्रमुख ड्रोन मेकर है और अनुमान है कि वह हर महीने 10,000 तक ड्रोन बनाता है. हालांकि, विश्लेषकों ने यह भी कहा कि ये प्रतिबंध काफी हद तक लक्षित हैं, और इनसे तेहरान को अपनी खरीद के लिए वैकल्पिक सप्लाई चैनलों का इस्तेमाल करने का समय मिल सकता है.

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