India

2040 तक स्वदेशी होगी IAF की ताकत, AMCA और तेजस Mk2 बनेंगे नई रीढ़

भारतीय वायुसेना अगले डेढ़ दशक में अपने लड़ाकू बेड़े को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है. एयरफोर्स का लक्ष्य 2040 तक ऐसा कॉम्बैट फ्लीट तैयार करना है, जिसमें करीब 60 प्रतिशत लड़ाकू विमान स्वदेशी हों. ये बदलाव भारत की हवाई ताकत को नई ऊंचाई देगा और क्षेत्रीय संतुलन, खासकर पाकिस्तान के मुकाबले, भारत के पक्ष में मजबूत करेगा. सूत्रों के मुताबिक, 2040 तक भारतीय वायुसेना के पास लगभग 454 स्वदेशी लड़ाकू विमान होंगे. इसके साथ ही एयरफोर्स अपनी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की क्षमता को भी दोबारा हासिल करने पर काम कर रही है.

2040 तक स्वदेशी होगी IAF की ताकत, AMCA और तेजस Mk2 बनेंगे नई रीढ़
2040 तक स्वदेशी होगी IAF की ताकत, AMCA और तेजस Mk2 बनेंगे नई रीढ़

इस पूरी स्ट्रैटेजी का केंद्र तेजस और AMCA कार्यक्रम हैं. योजना के तहत वायुसेना में 180 तेजस Mk1A लड़ाकू विमान शामिल किए जाएंगे. इसके अलावा करीब 40 पुराने तेजस Mk1 विमान भी अगले दशक तक सेवा में बने रहेंगे. ये विमान पुराने Jaguar और MiG21 स्क्वाड्रनों की जगह लेंगे, जिन्हें अगले 5 से 6 सालों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा.

ऑपरेशनल क्षमता पर नहीं पड़ेगा असर

मध्यम श्रेणी के लड़ाकू विमानों में तेजस Mk2 की अहम भूमिका होगी. वायुसेना 138 तेजस Mk2 विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है. शुरुआत में ये विमान MiG29UPG स्क्वाड्रनों की जगह लेंगे, जबकि बाद में Mirage2000 और Jaguar DARINIII विमानों को भी रिप्लेस करेंगे. इससे पुराने विमानों को हटाने के दौरान वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता पर असर नहीं पड़ेगा.

भविष्य के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान के रूप में AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft को देखा जा रहा है. वायुसेना 96 AMCA विमानों को शामिल करना चाहती है. पहले चरण में 40 AMCA Mk1 विमान शामिल होंगे, जिनमें GE F414 इंजन लगे होंगे. इनकी डिलीवरी 2035 के आसपास शुरू होने और 2037 तक ऑपरेशनल होने की उम्मीद है.

‘सबसे आधुनिक और संतुलित एयर पावर’

इसके बाद 50 से 56 AMCA Mk2 विमानों को शामिल किया जाएगा, जिनमें ज्यादा एडवांस इंजन और आधुनिक सिस्टम होंगे. AMCA भारत को पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर क्लब में शामिल करेगा. इसमें स्टेल्थ तकनीक, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्कसेंट्रिक वारफेयर जैसी आधुनिक क्षमताएं होंगी.

हालांकि, वायुसेना का फोकस स्वदेशीकरण पर है, लेकिन क्षमता की कमी को तेजी से पूरा करने के लिए विदेशी विमानों की खरीद भी जारी रहेगी. भारतीय वायुसेना 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए MRFA कार्यक्रम पर काम कर रही है. इसके अलावा रूस से 60 Su57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने की संभावना भी बनी हुई है. तेजस, AMCA और विदेशी विमानों के इस मिश्रण से भारतीय वायुसेना 2040 तक एशिया की सबसे आधुनिक और संतुलित एयर पावर में से एक बन सकती है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply