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मीरा भाएंदर में छत्रपति शिवाजी की मूर्ति को लेकर विवाद गहराया, बीजेपी के प्रस्ताव का शिवसेना और कांग्रेस ने किया विरोध

प्रताप सरनाईक और नरेंद्र मेहता के बीच काशीमीरा चौक स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. प्रतिमा की मरम्मत और संभावित स्थानांतरण को लेकर शुरू हुआ विवाद, अब राजनीतिक आरोपप्रत्यारोप में बदलता नजर आ रहा है. मामला तब तूल पकड़ा जब मीरा भाईंदर महानगरपालिका मैं बीजेपी ने बहुमत के साथ इस प्रतिमा को हटाने का प्रस्ताव पारित किया. इस प्रस्ताव का सदन मैं एकनाथ शिंदे की शिवसेना और कांग्रेस ने खुलकर विरोध किया.

मीरा भाएंदर में छत्रपति शिवाजी की मूर्ति को लेकर विवाद गहराया, बीजेपी के प्रस्ताव का शिवसेना और कांग्रेस ने किया विरोध
मीरा भाएंदर में छत्रपति शिवाजी की मूर्ति को लेकर विवाद गहराया, बीजेपी के प्रस्ताव का शिवसेना और कांग्रेस ने किया विरोध

मीराभाईंदर महानगरपालिका मैं कुल 95 नगरसेवक है, जिसमें बीजेपी के 78 है, 13 कांग्रेस है एक निर्दलीय और 3 एकनाथ शिंदे की शिवसेना है. काशीमीरा के अश्वारूढ़ शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने का प्रस्ताव जब मनपा मैं पारित हुआ तो 95 मैं से कुल 79 नगरसेवकों ने इसे सहमति देकर पारित करा लिया. लेकिन सदन मैं शिंदे शिवसेना और कांग्रेस ने खुलकर इस प्रस्ताव का विरोध किया.

शिंदे सेना के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि काशीमीरा में शॉपिंग मॉल बनाने के लिए करीब 30 साल पुरानी छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को मरम्मत के नाम पर हटाने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि मीराभाईंदर की सत्ताधारी भाजपा इस योजना के तहत प्रतिमा को स्थायी रूप से हटाना चाहती है. शिवसेना मीरा भयंदर शहर प्रमुख विक्रम प्रताप सिंह ने साफ कहा कि अगर महाराष्ट्र के आराध्य देवत छत्रपति शिवाजी महाराज की इस प्रतिमा को हटाया गया तो शिवसेना भूमिपुत्रों के साथ सड़क पर उतरकर हंगामा करेगी.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

दरअसल हाल ही में मीराभाईंदर महानगरपालिका की महासभा में काशीमीरा चौक स्थित प्रतिमा को मरम्मत के लिए हटाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया. प्रशासन की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में प्रतिमा की मरम्मत के बाद उसके स्थानांतरण का भी उल्लेख किया गया है. इसी शब्द को लेकर शिवप्रेमियों और विभिन्न संगठनों ने आशंका जताई है कि प्रतिमा को दोबारा मूल स्थान पर स्थापित नहीं किया जाएगा. प्रताप सरनाईक ने दावा किया कि साल 2017 में महानगरपालिका ने घोडबंदर क्षेत्र में नई छत्रपति शिवाजी महाराज प्रतिमा स्थापित करने के दौरान जिला प्रशासन को दिए गए शपथपत्र में दो किलोमीटर दूर स्थित पुराने पुतले को हटाने का उल्लेख किया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि अब उसी योजना को अमल में लाने की कोशिश की जा रही है. शिवसेना ने यह भी आरोप लगाया कि जिस महासभा में प्रतिमा की मरम्मत और स्थानांतरण का प्रस्ताव मंजूर किया गया, उसी बैठक में प्रतिमा के दोनों ओर महानगरपालिका की जमीन पर शॉपिंग मॉल बनाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया. उन्होंने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता पर सत्ता का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

नरेंद्र मेहता ने आरोपों को किया खारिज

वहीं भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रतिमा में दरारें आ गई हैं और विशेषज्ञों की सलाह से उसकी मरम्मत जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिमा को केवल अस्थायी रूप से हटाया जाएगा और मरम्मत के बाद उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाएगा. नरेंद्र मेहता ने कहा, “कुछ लोग इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति कर रहे हैं. यदि प्रतिमा को नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? हम शिवाजी महाराज का सम्मान करने वाले लोग हैं और प्रतिमा को उसी स्थान पर दोबारा लगाया जाएगा.”

उन्होंने यह भी कहा कि वेस्टर्न होटल के पास दुनिया की सबसे ऊंची छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने का काम उनकी ओर से किया गया है, जिससे शिवराय के प्रति उनकी भावना स्पष्ट होती है.

शिवप्रेमियों में बढ़ रही नाराजगी

वहीं राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने का खुलकर विरोध किया है. एमएनएस का कहना है कि महाराज की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ अपमानजनक है और एमएनएस इसका खुलकर विरोध करेगी. फिलहाल प्रतिमा की मरम्मत के लिए विशेषज्ञ मूर्तिकारों और सलाहकारों की नियुक्ति पर चर्चा चल रही है. हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मरम्मत के बाद प्रतिमा को मूल स्थान पर ही स्थापित किया जाएगा या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा. इसी अनिश्चितता के चलते शिवप्रेमियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा मीराभाईंदर की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है. काशीमीरा चौक स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा अब एक बार फिर शहर की राजनीति का केंद्र बन गई है.

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