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एक साल तक न खरीदें सोना, जानें PM मोदी को अभी क्यों करनी पडी ये अपील

नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भारतीयों से राष्ट्रीय हित में एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के एक दिन बाद थिंक टैंक जीटीआरआई की प्रतिक्रिया आई है। उसने इस अपील का समर्थन किया है। साथ ही ऐसा किए जाने के मायने भी बताए हैं। जीटीआरआई का कहना है कि सोने के बढ़ते आयात से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है। ट्रेड बैलेंस पर इसका असर है।

एक साल तक न खरीदें सोना, जानें PM मोदी को अभी क्यों करनी पडी ये अपील
एक साल तक न खरीदें सोना, जानें PM मोदी को अभी क्यों करनी पडी ये अपील

अपनी रिपोर्ट में थिंक टैंक ने कहा, ‘जीटीआरआई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने भारतीयों से एक साल तक सोना न खरीदने को कहा है। सोने के बढ़ते आयात से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन को नुकसान पहुंच रहा है।’

पीएम मोदी ने क्‍या की थी अपील?
रविवार को पीएम ने नागरिकों से गैरजरूरी सोने की खरीदारी को टालने की अपील की थी। ग्‍लोबल आर्थिक अनिश्चितता के बीच शादीब्याह से जुड़ी खरीदारी सहित ऐसा करने करने को कहा था। भारत अपनी सोने की लगभग सभी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
इसलिए सोने की बढ़ती आवक अर्थव्यवस्था पर लगातार भारी बोझ डाल रही है।

थिंक टैंक ने समझाए मायने
थिंक टैंक ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में सोने की छड़ों का आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 58.9 अरब डॉलर हो गया है। इससे देश के व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी खपत का लगभग सारा सोना आयात ही करता है।

GTRI ने दिया सुझाव
हालांकि, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने सरकार से यह भी अपील की कि वह देश के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के लिए भारतयूएई मुक्त व्यापार समझौते के तहत कीमती धातुओं पर दी जाने वाली रियायतों की समीक्षा करे।

उसने कहा, ‘इसके साथ ही जीटीआरआई सरकार से अपनी FTA नीतियों की समीक्षा करने की करता है। विशेष रूप से भारतयूएई व्यापार समझौते के तहत दुबई को कीमती धातुओं पर दी जाने वाली टैरिफ रियायतों की।’ जीटीआरआई का कहना है कि इन रियायतों ने हाल के दिनों में सोने के आयात में हुई भारी बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई है।

अश्विनी वैष्णव ने पीएम मोदी की अपील को दोहराया
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी पीएम मोदी की उस अपील को दोहराया जिसमें उन्होंने नागरिकों से आयात से जुड़े खर्च को कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि यह अपील अब और भी ज्‍यादा जरूरी हो गई है। कारण है कि मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष अभी तक सुलझ नहीं पाया है। इसका असर पूरी ग्‍लोबल अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026 में वैष्णव ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में शांति अभी भी बहुत दूर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के आर्थिक हितों की रक्षा करने में हर नागरिक की भूमिका है। इसके लिए जहां तक संभव हो, विदेशी मुद्रा पर होने वाले खर्च को कम किया जाना चाहिए। साथ ही विदेशी मुद्रा की कमाई को बढ़ाया जाना चाहिए।

विदेशी मुद्रा की बचत करने की कही बात
मंत्री ने आगे कहा कि विदेशी मुद्रा की बचत की शुरुआत हमारे रोजमर्रा के फैसलों से ही होनी चाहिए। मसलन, डीजल और पेट्रोल की खपत कम करके ईंधन पर होने वाले खर्च को घटाना। उन्होंने व्यक्तियों, व्यवसायों और उद्योगों से अपनीअपनी क्षमता के अनुसार इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।

उनकी ये प्रतिक्रिया मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच आई हैं। इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को 70 दिन से ज्‍यादा हो चुके हैं। इसके चलते होर्मुज स्‍ट्रेट में पैदा हुई बाधाओं का असर ग्‍लोबल एनर्जी फ्लो पर पड़ रहा है।

सोने का आयात बिल कितना?
प्रधानमंत्री ने ऐसे समय में अपील की है जब भारत के सोने के आयात का बिल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बुलियन बाजार है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 202526 में भारत का सोने का आयात 24 फीसदी बढ़कर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। जबकि 202425 में यह 58 अरब डॉलर था। 202324 में आयात 45.54 अरब डॉलर और 202223 में 35 अरब डॉलर था।

इस बीच पीएम मोदी की घोषणा के बाद आभूषण बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने मांग में संभावित गिरावट की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी।

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