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हाइटेक जंग के दौर में आधुनिकीकरण में जुटी भारतीय सेना, L-70 और ZU-23-2 गनों की जगह लेगी नई ADGS प्रणाली

भारतीय सेना तेजी से बदलते ग्लोबल हालात और आधुनिक युद्ध के खतरे को देखते हुए अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को पूरी तरह अपग्रेड करने की तैयारी में लगी हुई है. सेना अब दशकों पुरानी Bofors L70 और ZU232 एयर डिफेंस गनों को हटाकर नई पीढ़ी की Air Defence Gun System तैनात करने जा रही है. इन पुरानी गन का इस्तेमाल पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था. अब आधुनिकीकरण परियोजना के तहत करीब 2,000 पुरानी एयर डिफेंस गनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा और एडवांस हथियारों को शामिल किया जाएगा.

हाइटेक जंग के दौर में आधुनिकीकरण में जुटी भारतीय सेना, L-70 और ZU-23-2 गनों की जगह लेगी नई ADGS प्रणाली
हाइटेक जंग के दौर में आधुनिकीकरण में जुटी भारतीय सेना, L-70 और ZU-23-2 गनों की जगह लेगी नई ADGS प्रणाली

सेना ने फिलहाल 220 आधुनिक towed air defence gun systems की मांग रखी है, जो मौजूदा L70 गनों की जगह लेंगी. नई ADGS प्रणाली के ट्रायल और मूल्यांकन प्रक्रिया जारी है और इसके अहम परीक्षण 2 महीने बाद जुलाई के आसपास होने की संभावना जताई जा रही है.

ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन ने बदली जंग की तस्वीर

हाल के सालों में रूसयूक्रेन के बीच युद्ध हो या फिर पश्चिम एशिया संघर्ष या पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा तनाव ने यह साफ कर दिया है कि सस्ते ड्रोन, swarm attacks और loitering munitions आधुनिक युद्ध का सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं.

लाखों डॉलर की Interceptor Missile से कुछ हजार डॉलर के ड्रोन को मार गिराना अब आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं माना जा रहा. इसी वजह से दुनिया की सेनाएं फिर से gunbased air defence systems को प्राथमिकता दे रही हैं. नई ADGS प्रणाली कम लागत में बड़ी संख्या में ड्रोन, लोफ्लाइंग टारगेट्स और क्रूज मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगी.

स्मार्ट गोलाबारूद होगी असली ताकत

नई Air Defence Gun System की सबसे बड़ी खासियत इसका Advanced Programmable Ammunition होगा. यह प्रणाली आधुनिक 35mm या 40mm Programmable Fragmentation rounds का इस्तेमाल करेगी. इन स्मार्ट गोलाबारूद में Programmable Fuse लगा होगा, जो लक्ष्य के सामने सही समय पर विस्फोट करेगा. इससे हवा में Fragmentation Cloud बनेगा और ड्रोन या मिसाइल को नष्ट करने की संभावना काफी बढ़ जाएगी.

पहले, पुरानी एंटीएयरक्राफ्ट गनों में सीधे निशाने की जरूरत होती थी, लेकिन नई Airburst Ammunition तकनीक Swarm Drones और Loitering Munitions के खिलाफ कहीं ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है.

मल्टीलेयर एयर डिफेंस का आखिरी सुरक्षा कवच

भारतीय सेना के पास नई ADGS प्रणाली देश की multilayered air defence architecture का अंतिम hardkill layer होगी. देश की एयर डिफेंस संरचना कई स्तरों में काम करती है क्योंकि इसमें लंबी दूरी के लिए S400 सिस्टम है. मध्यम दूरी के लिए आकाश मिसाइल सिस्टम और अंतिम नजदीकी सुरक्षा के लिए gunbased air defence systems है.

अगर कोई ड्रोन, क्रूज मिसाइल या loitering munition बाहरी मिसाइल डिफेंस को पार कर लेता है, तो ADGS अंतिम सुरक्षा परत के रूप में सैन्य ठिकानों, एयरबेस और सैनिक टुकड़ियों की रक्षा करेगी.

नई सुरक्षा प्रणाली में advanced electrooptical sensors और tracking systems लगाए जाएंगे. इससे यह सिस्टम radar jam होने या electronic warfare की स्थिति में भी स्वतंत्र रूप से लक्ष्य पहचानकर हमला कर सकेगा.

यह प्रणाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के LowLevel Lightweight Radar जैसे आधुनिक रडार से भी डेटा ले सकेगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर autonomous mode में भी काम करेगी.

क्या है पूरी टाइमलाइन?

इस आधुनिक रडार को लेकर जुलाई 2026 में बड़े स्तर पर ट्रायल किए जाने की संभावना है. 2026 के अंत या 2027 में विजेता सिस्टम का चयन हो सकता है. अगले साल में शुरुआती कॉन्ट्रेक्ट साइन होने की उम्मीद है. 20282029 तक पहली डिलीवरी शुरू हो सकती है. जबकि साल 2030 के बाद बड़े पैमाने पर पुरानी गनों को हटाने की प्रक्रिया तेज होगी. माना जा रहा है कि आधुनिकीकरण का पूरा कार्यक्रम 20322035 तक चल सकता है

इस परियोजना में भारतीय रक्षा कंपनियों की बड़ी भूमिका हो सकती है. इन संभावित कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, लार्सेन एंड टर्बो, भारत फोर्ज के साथसाथ कई विदेशी कंपनियों के साथ Joint Ventures शामिल हो सकते हैं. आने वाले सालों में ADGS भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण Tactical Defence Systems में से एक बन सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ड्रोन युद्ध और Lowcost Aerial Attacks तेजी से बढ़ रहे हैं.

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