सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद देश के ज्वेलरी बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगे होते सोने के बीच अब भारतीय परिवार अपनी तिजोरियों में पड़ा पुराना सोना बाजार में निकाल सकते हैं. इससे गोल्ड एक्सचेंज, पुराने गहनों की बिक्री और गोल्ड लोन जैसी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है. ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि ऊंची कीमतों और बढ़ी हुई ड्यूटी की वजह से नए सोने की मांग में 1015% तक की गिरावट आ सकती है. ऐसे में लोग पुराने गहनों को बेचकर या एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी खरीदने को प्राथमिकता देंगे.

ईटी की रिपोर्ट में भीमा ज्वेलर्स के चेयरमैन बी. गोविंदन ने कहा कि आने वाले समय में बाजार में बड़ी मात्रा में पुराना सोना आने की उम्मीद है. उनका कहना है कि महंगे सोने की वजह से ग्राहकों का रुझान पुराने गहनों के इस्तेमाल की तरफ बढ़ेगा. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन सुरेंद्र मेहता ने भी माना कि बढ़ी हुई ड्यूटी का असर बाजार पर साफ दिखाई देगा. उन्होंने कहा कि लोग नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए गहनों के बदले गोल्ड लोन लेना बढ़ा सकते हैं. साथ ही, सोने की तस्करी बढ़ने का भी खतरा रहेगा. उनके अनुसार, पहले जब इंपोर्ट ड्यूटी ज्यादा थी, तब हर साल करीब 100 से 120 टन सोना अवैध रास्तों से भारत पहुंचता था.
तिजोरियों में पड़ा है काफी सोना
अनुमान के हिसाब से भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन सोना मौजूद है, जिसमें बड़ा हिस्सा वर्षों से तिजोरियों में पड़ा हुआ है. अगर इस स्टॉक का थोड़ा हिस्सा भी रीसाइक्लिंग और औपचारिक कारोबार के जरिए बाजार में आता है, तो देश का गोल्ड इंपोर्ट काफी कम हो सकता है. इससे चालू खाता घाटे पर भी दबाव घटेगा.
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 14 कैरेट और 9 कैरेट जैसे कम कैरेट वाले गहनों को बढ़ावा देने से भी सोने के इंपोर्ट में 2030% तक कमी लाई जा सकती है. वहीं, गोल्ड बार और सिक्कों में निवेश कम होने से भी इंपोर्ट घटाने में मदद मिलेगी. जोस अलुक्कास के चेयरमैन वर्गीस अलुक्कास का कहना है कि ड्यूटी बढ़ने के बाद ग्राहक पुराने गहने बेचकर नकदी लेने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि बड़े ज्वेलरी रिटेलर्स की करीब आधी बिक्री अब पुराने सोने के एक्सचेंज के जरिए ही हो रही है.



