Madhya Pradesh

MP में 8 साल में कबाड़ बनीं सरकारी EV कारें, 77 लाख की 7 गाड़ियां अब सिर्फ शोपीस

Bhopal News: मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. करीब आठ साल पहले सरकारी उपयोग और ईमोबिलिटी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से खरीदी गई सात इलेक्ट्रिक कारें अब अनुपयोगी होकर ऊर्जा विकास निगम के दफ्तर परिसर में खड़ीखड़ी खराब हो रही हैं. इन वाहनों की खरीद पर वर्ष 201718 में लगभग 77 लाख रुपए खर्च किए गए थे.

MP में 8 साल में कबाड़ बनीं सरकारी EV कारें, 77 लाख की 7 गाड़ियां अब सिर्फ शोपीस
MP में 8 साल में कबाड़ बनीं सरकारी EV कारें, 77 लाख की 7 गाड़ियां अब सिर्फ शोपीस

जानकारी के अनुसार, इन इलेक्ट्रिक कारों को टाटा मोटर्स के मॉडलों के रूप में Energy Efficiency Services Limited की मदद से खरीदा गया था. इनका उद्देश्य सरकारी विभागों में ईवी के उपयोग को बढ़ावा देना और ईंधन खर्च में कमी लाना था.

सूत्रों के मुताबिक, कुछ वाहन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए थे. हालांकि, कुछ समय बाद सभी वाहन वापस ऊर्जा विकास निगम के पास लौट आए और तब से उनका नियमित उपयोग बंद हो गया.

क्यों नहीं बदल पा रही बैटरी?

बताया जा रहा है कि इन कारों के रखरखाव में कई तकनीकी और आर्थिक चुनौतियां सामने आईं. सबसे बड़ी समस्या बैटरी बदलने की थी, जिसकी लागत प्रति वाहन लगभग 4 से 5 लाख रुपए बताई गई. इसके अलावा पुराने मॉडलों के स्पेयर पार्ट्स और सर्विस सपोर्ट की उपलब्धता भी सीमित हो गई, जिससे वाहन लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े रहे.

क्या बोले मंत्री विश्वास सारंग?

मामले पर प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि जहां संभव हो, वहां सरकारी वाहनों के उपयोग के जरिए बचत की जाए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ईवी को बढ़ावा देने के लिए पहले भी कई पहल की हैं. हालांकि संबंधित वाहनों की वर्तमान स्थिति की उन्हें तत्काल जानकारी नहीं है.

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि बचत के कई तरीके होते हैं और केवल पेट्रोल की खपत कम करना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने सरकारी खर्चों और कार्यक्रमों पर भी कटौती की जरूरत बताई. यह मामला सरकारी खरीद, रखरखाव योजना और ईवी नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर नए सवाल खड़े कर रहा है.

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