LPG Petrol Diesel Price Hike Next? पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने बीते 48 घंटे में तीन अहम फैसले लिए हैं. सरकार ने सोनाचांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाया है. दूध की कीमतों में इजाफा हुआ और चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी गई है. इससे आशंका को मजबूत किया है कि आने वाले दिनों में पेट्रोलडीजल और एलपीजीरसोई गैस की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, केंद्र सरकार ने फिलहाल ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान यह दिखाते हैं कि सरकार हालात को लेकर गंभीर है.

PM मोदी की अपील ने बढ़ाई अटकलें
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी. उन्होंने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल और जरूरत पड़ने पर स्कूलों में ऑनलाइन क्लास जैसे विकल्प अपनाने की बात कही थी. सरकार की यह अपील ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया संकट की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. यही कारण है कि अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार आने वाले समय में किसी बड़े आर्थिक दबाव की तैयारी कर रही है.
पहला फैसला: सोनाचांदी पर ड्यूटी बढ़ी
सरकार ने सोना और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है. सरकार का उद्देश्य गैरजरूरी आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव आता है. विशेषज्ञों का कहना है कि संकट के समय सरकारें अक्सर लग्जरी आयात पर ड्यूटी बढ़ाकर जरूरी चीजों, खासकर ऊर्जा क्षेत्र, के लिए विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश करती हैं.
दूसरा फैसला: दूध की महंगाई
सोनाचांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद मदर डेयरी और अमूल जैसी बड़ी सहकारी समितियों ने दूध की कीमतें बढ़ा दी हैं. अलगअलग वैरिएंट के दूध पर प्रति लीटर 1 से 5 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है. समितियों का कहना है कि खरीद और ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ीं. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा होने का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर दिखना शुरू हो गया है.
तीसरा फैसला: चीनी निर्यात पर रोक
सरकार ने 30 सितंबर तक कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है . इसका मकसद घरेलू सप्लाई बनाए रखना और महंगाई को नियंत्रित करना बताया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक संकट लंबा खिंचता है, तो शिपिंग और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ सकती है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं. ऐसे में सरकार पहले से ही जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है.



