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महंगा तेल बिगाड़ेगा रसोई का खेल! प्याज-टमाटर से लेकर दाल-चावल तक, क्या-क्या हो सकता है महंगा?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. पहली नजर में लोगों को इसका असर पेट्रोल पंप पर गाड़ियों में तेल भरवाते समय दिखाई देगा, लेकिन इसका असली असर आम लोगों की रसोई पर पड़ सकता है. क्योंकि तेल के दाम बढ़ने से प्याजटमाटर से लेकर दालचावल तक, रसोई में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर चीज महंगी हो सकती है.

महंगा तेल बिगाड़ेगा रसोई का खेल! प्याज-टमाटर से लेकर दाल-चावल तक, क्या-क्या हो सकता है महंगा?
महंगा तेल बिगाड़ेगा रसोई का खेल! प्याज-टमाटर से लेकर दाल-चावल तक, क्या-क्या हो सकता है महंगा?

दरअसल, भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पेट्रोल और डीजल पर निर्भर करती है. सब्जियां ढोने वाले ट्रकों से लेकर घर तक ऑनलाइन ऑर्डर किए गए राशन तक, लगभग सबकुछ ट्रांसपोर्ट पर निर्भर करता है. अब अगर महंगे तेल की वजह से ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ती है तो जाहिर सी बात है कि उन चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जो ट्रांसपोर्ट के जरिए आपके घर तक पहुंचाई जाती हैं.

हर चीज पर असर क्यों पड़ता है?

असल में, डीजल को भारत की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. सब्जियां, फल, दूध, दवाइयां, पैकेज्ड फूड और रोजमर्रा का सामान ले जाने वाले ज्यादातर ट्रक डीजल पर चलते हैं. इसके अलावा बसें, ट्रैक्टर, जनरेटर और कमर्शियल वाहन भी डीजल पर काफी निर्भर हैं.

वहीं, ऑनलाइन डिलीवरी करने वाले ज्यादातर लोग बाइक या पेट्रोल से चलने वाले छोटे पिकअप वाहनों का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में पेट्रोल और डीजल दोनों की बढ़ी हुई कीमतें ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ा देती हैं. इससे सामान को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने का खर्च बढ़ जाता है. बाद में कंपनियां और व्यापारी इस अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल देते हैं.

यही कारण है कि पेट्रोलडीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, ₹3 की बढ़ोतरी से रातोंरात सब्जियां और फल महंगे नहीं होंगे, लेकिन लगातार बढ़ता ट्रांसपोर्ट खर्च सप्लाई चेन पर दबाव बनाता है और धीरेधीरे चीजों के दाम बढ़ सकते हैं.

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी जताई चिंता

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहा कि पहले से ही ट्रांसपोर्ट व्यवसायी टोल टैक्स, महंगे स्पेयर पार्ट्स, बीमा प्रीमियम, फिटनेस, परमिट, टैक्स और अन्य बढ़ते परिचालन खर्चों के दबाव में काम कर रहे हैं. ऐसे समय में डीजल की बढ़ती कीमत सेक्टर के लिए आर्थिक बोझ बनती जा रही है.

उन्होंने कहा कि ईंधन कीमतों में थोड़ीसी बढ़ोतरी भी फल, सब्जियां, दवाइयां, निर्माण सामग्री, दैनिक उपभोग की वस्तुओं और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई लागत बढ़ा देती है, जिससे बाजार में महंगाई बढ़ने की आशंका स्वाभाविक है.

क्या सब्जियां और किराना महंगा हो सकता है?

ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने से सब्जियां, फल, दूध, दही, पनीर, अनाज, खाने का तेल और पैकेज्ड फूड की कीमतें बढ़ सकती हैं. जल्दी खराब होने वाले सामान ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि इन्हें तेजी से पहुंचाना पड़ता है और कई बार कोल्ड स्टोरेज या रेफ्रिजरेटेड वाहनों की जरूरत होती है, जिनमें अतिरिक्त ईंधन खर्च होता है. इसी वजह से पेट्रोलडीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अक्सर सबसे पहले रसोई के बजट पर दिखाई देता है.

उदाहरण के तौर पर देखें तो राज्यों के बीच आने वाले टमाटर, प्याज और फल थोड़े महंगे हो सकते हैं. डेयरी कंपनियों का दूध वितरण खर्च बढ़ सकता है. वहीं, पैकेज्ड किराना कंपनियों का लॉजिस्टिक खर्च भी बढ़ सकता है. भले ही कंपनियां तुरंत MRP न बढ़ाएं, लेकिन स्थानीय दुकानदार और डिस्ट्रीब्यूटर ट्रांसपोर्ट खर्च के हिसाब से कीमतें बढ़ा सकते हैं.

क्या डिलीवरी फीस बढ़ सकती है?

Blinkit, Swiggy, Zomato और Zepto भी आने वाले समय में प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा सकते हैं. इन कंपनियों की डिलीवरी व्यवस्था पूरी तरह ईंधन आधारित नेटवर्क पर चलती है. गोदाम से सामान लाने और ग्राहकों तक पहुंचाने वाले राइडर्स तक, हर स्तर पर ईंधन की जरूरत पड़ती है.

पेट्रोल महंगा होने पर कंपनियां डिलीवरी फीस, प्लेटफॉर्म या हैंडलिंग चार्ज, पीक टाइम में सर्ज प्राइसिंग और न्यूनतम ऑर्डर राशि बढ़ा सकती हैं. एक बार में 1020 रुपये का अतिरिक्त खर्च छोटा लग सकता है, लेकिन समय के साथ यूजर्स इसका असर महसूस कर सकते हैं.

किसानों पर क्या असर होगा?

खेतीकिसानी भी डीजल पर काफी निर्भर करती है. किसान ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और फसल कटाई मशीनों में डीजल का इस्तेमाल करते हैं. डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ सकती है. आगे चलकर इसका असर फसलों की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

क्या ₹3 की बढ़ोतरी से घर का बजट बिगड़ सकता है?

अकेले ₹3 ज्यादा नहीं लगते, लेकिन ईंधन की कीमतें सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहतीं. इसका असली असर धीरेधीरे दिखाई देता है. क्योंकि पेट्रोलडीजल महंगा होने से किराना से लेकर किराया तक, लगभग हर चीज प्रभावित हो सकती है.

यही कारण है कि पेट्रोलडीजल की कीमतें आम लोगों के घरेलू बजट को उम्मीद से ज्यादा प्रभावित कर सकती हैं. क्योंकि भले ही आप रोज गाड़ी न चलाते हों, लेकिन आपके घर पहुंचने वाली लगभग हर चीज किसी न किसी स्तर पर ईंधन के सहारे ही आती है.

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