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गुस्सा, तनाव या भूख…हर बात पर आ जाता है रोना? जानें खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनाने के तरीके

इमोशनल होना मासूम, दिल के साफ होने की निशानी है. लेकिन कुछ लोग हर बात पर रोने लगते हैं. कई बार गुस्सा आने पर, ज्यादा तनाव होने पर या फिर छोटीसी बात से भी आंखों में आंसू आ जाते हैं. कुछ लोग इतने ज्यादा संवेदनशील होते हैं कि भूख लगने, थकान होने या किसी की बात दिल पर लग जाने पर भी खुद को संभाल नहीं पाते. शुरुआत में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन अगर हर छोटी बात पर रोना आने लगे, तो यह आपकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति का संकेत भी हो सकता है।

गुस्सा, तनाव या भूख…हर बात पर आ जाता है रोना? जानें खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनाने के तरीके
गुस्सा, तनाव या भूख…हर बात पर आ जाता है रोना? जानें खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनाने के तरीके

एक्सपर्ट बताते हैं कि जरूरत से ज्यादा इमोशनल होना कई कारणों से जुड़ा हो सकता है. लगातार तनाव, नींद की कमी, हार्मोनल बदलाव, मानसिक दबाव या लंबे समय तक फिलिंग्स को दबाकर रखना इंसान को अंदर से कमजोर बना सकता है. लेकिन हर बात पर रोने से लोग आपको कमजोर समझ सकते हैं. इसलिए चलिए जानते हैं खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनाने के कुछ आसान तरीके.

10 सेकंड तक गहरी सांस लें

रिसर्च के मुताबिक, जब इंसान गुस्से, तनाव या इमोशनल दबाव में होता है, तो उसकी सांसें तेज हो जाती हैं. ऐसे में धीरेधीरे गहरी सांस लेना दिमाग को शांत करने में मदद करता है. आप 4 सेकंड तक सांस अंदर लें, कुछ सेकंड रोकें और फिर धीरेधीरे बाहर छोड़ें. इससे शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स कम होने लगता है और रोने की इंटेंसिटी भी घट सकती है.

तुरंत थोड़ा पानी पिएं

अगर आपको गुस्से या स्ट्रेस में रोना आ रहा है तो तुंरत पानी पीना इसे कंट्रोल कर सकता है. दरअसल, रोने की स्थिति में शरीर और दिमाग दोनों हाई इमोशनल मोड में चले जाते हैं. ऐसे समय में धीरेधीरे पानी पीना दिमाग को कुछ सेकंड का ब्रेक देता है और ध्यान भावनाओं से हटने लगता है.

भूख लगने पर तुरंत कुछ हेल्दी खाएं

कई रिसर्च में पाया गया है कि लो ब्लड शुगर मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकता है. इसी वजह से भूख लगने पर कुछ लोग ज्यादा इमोशनल महसूस करने लगते हैं. ऐसे में फल, ड्राई फ्रूट्स, दही या कोई हल्का हेल्दी स्नैक खाना मूड को जल्दी बैलेंस करने में मदद कर सकता है.

ध्यान दूसरी चीजों पर फोकस करें

जब हम लगातार उसी बात के बारे में सोचते रहते हैं जिसने हमें दुखी किया है, तो रोना और बढ़ सकता है. ऐसे में अपने आसपास की चीजों पर ध्यान देना मददगार हो सकता है. उदाहरण के लिए कमरे में मौजूद 5 चीजों के नाम सोचें, कोई गाना सुनें या कुछ मिनट के लिए बाहर टहल लें. इससे दिमाग का फोकस बदलने लगता है.

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