Grafting Technique: आपने कई बार ऐसे पेड़ों के बारे में सुना होगा, जिन पर एक साथ कई तरह के आम लगते हैं. ऐसे में लोग ये सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर ये कैसे होता है? दरअसल, यह कोई जादू नहीं बल्कि वैज्ञानिक तकनीक का कमाल है. खासतौर पर आम के पेड़ों में इस तकनीक का इस्तेमाल काफी पॉपुलर हो रहा है, क्योंकि इससे किसान और बागवान कम जगह में ज्यादा किस्मों के फल एक ही पेड़ पर उगा सकते हैं. इस तकनीक का को ग्राफ्टिंग कहते हैं. जिसकी मदद से आप एक ही पेड़ पर कई तरह के फल उगा सकते हैं.

ये तकनीक अब काफी ज्यादा पॉपुलर हो रही है. खासतौर पर आम के पेड़ और सब्जियों में इसका इस्तेमाल काफी ज्यादा हो गया है. चलिए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं कि ग्राफ्टिंग तकनीक होती क्या है? इसे फल उगाने के लिए कैसे इस्तेमाल किया जाता है और इससे जुड़ी कई जरूरी बातें.
क्या होती है ग्राफ्टिंग तकनीक ?
ग्राफ्टिंग एक ऐसा प्रोसेस है, जिसमें दो अलगअलग पौधों के हिस्सों या टहनियों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है. जिसे “रूटस्टॉक” कहा जाता है. इसके साथ दूसरे पौधे की शाखा या कलम, जिसे “साइयन” कहा जाता है, को जोड़ा जाता है. जब ये दोनों हिस्से सही तरीके से जुड़ जाते हैं, तो वे एक ही पौधे की तरह बढ़ने लगते हैं. इस तकनीक की मदद से एक पेड़ पर अलगअलग किस्म के फल उगाए जा सकते हैं, जैसे एक ही आम के पेड़ पर दशहरी, लंगड़ा और अल्फांसो जैसी कई किस्में लगना.
आम के पेड़ के लिए कैसे करें ग्राफ्टिंग?
अगर आपके घर में कम जगह है और आप एक ही पेड़ पर आम की कई किस्में उगाना चाहते हैं तो ग्राफ्टिंग एक बेहतर तरीका है. इसके लिए आपको सबसे पहले एक हेल्दी और मजबूत रूटस्टॉक यानी जड़ वाले पौधे को चुनना है. इसके बाद जिन किस्मों के आम उगाने हैं, उनकी स्वस्थ और ताजी टहनियां लें. पेड़ की शाखा पर हल्का कट लगाकर दूसरी किस्म की टहनी को उसमें फिट करें और प्लास्टिक टेप या ग्राफ्टिंग टेप से अच्छी तरह बांध दें. ध्यान रखें कि दोनों हिस्सों का कॉन्टैक्ट सही तरीके से हो, तभी ग्राफ्टिंग सक्सेसफुल होती है. कुछ हफ्तों बाद जब नई पत्तियां निकलने लगती हैं, तो इसका मतलब होता है कि ग्राफ्टिंग सफल रही है.
ग्राफ्टिंग के बाद आम के पेड़ की देखभाल के टिप्स
अगर आप ग्राफ्टिंग की मदद से फल उगा रहे हैं तो इसकी देखभाल करना भी जरूरी है. शुरुआत में ग्राफ्टिंग वाले पौधे को हल्की धूप में रखना होता है. साथ ही मिट्टी को बहुत ज्यादा गीला होने से भी बचाना चाहिए. बहुत ज्यादा पानी देने से जड़े खराब हो सकती है. सबसे जरूरी बात समयसमय पर सूखी या कमजोर शाखाओं को हटाते रहें, ताकि पौधे की एनर्जी सही विकास में लग सके. समयसमय पर जैविद खाद का भी इस्तेमाल करें. इससे पेड़ की ग्रोथ अच्छी होती है और फल भी जल्दी आते हैं.



