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पेट्रोल-डीजल से लेकर LNG-PNG सबकी सप्लाई का टंटा खत्म! आ गई खुशखबरी

India’s Strategic Underground Oil Reserve: पश्चिम एशिया में अमेरिकाईरान युद्ध के कारण भारत पर मंडरा रहे ऊर्जा संकट को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. इसी बीच पीएम मोदी ने यूरोप दौरे से पहले एक बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ चला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे पर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसके तहत अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी भारत के अंडरग्राउंड सामरिक पेट्रोलियम भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी. भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जमीन के नीचे विशालकाय गुफाओं में तेल का आपातकालीन बफर बनाता है. देश में विशाखापट्टनम, मंगलुरु, पाडुर और निर्माणाधीन चंडीखोल में ये विशाल रिजर्व मौजूद हैं. यह डील किसी भी वैश्विक संकट के दौरान भारत में पेट्रोलडीजल की किल्लत नहीं होने देगी.

पेट्रोल-डीजल से लेकर LNG-PNG सबकी सप्लाई का टंटा खत्म! आ गई खुशखबरी
पेट्रोल-डीजल से लेकर LNG-PNG सबकी सप्लाई का टंटा खत्म! आ गई खुशखबरी

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में मंडराते खतरे के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. भारत लंबे समय से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जमीन के नीचे बनी चार विशालकाय रॉक कैवर्न्स में अपना ‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार’ तैयार कर रहा है.

इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूएई यात्रा के दौरान एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है. इस डील के तहत यूएई की दिग्गज तेल कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी भारत के इन भूमिगत भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल जमा करेगी, जो किसी भी वैश्विक संकट के दौरान भारत के लिए संजीवनी का काम करेगा.

भारत का पहला सामरिक तेल भंडार आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित है. पूर्वी तट पर स्थित इस भूमिगत गुफा की क्षमता 1.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल जमा करने की है. इसके अंदर दो विशालकाय कंपार्टमेंट बनाए गए हैं. इनमें से एक को विशुद्ध रूप से राष्ट्रीय सामरिक रिजर्व के तौर पर रखा गया है, जबकि दूसरे हिस्से का इस्तेमाल हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड अपने दैनिक कार्यों के लिए करता है. यह व्यवस्था आपातकाल के दौरान तेल के निरंतर प्रवाह और परिचालन तत्परता को सुनिश्चित करती है.

दूसरा महत्वपूर्ण भूमिगत रिजर्व कर्नाटक के मंगलुरु में पश्चिमी तट पर है. इस अल्ट्रा मॉडर्न सुविधा की कुल क्षमता 1.5 मिलियन मीट्रिक टन है. इस रिजर्व की सबसे बड़ी खासियत अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के साथ इसकी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी है. यूएई की यह कंपनी पहले से ही इस भूमिगत गुफा में अपने कच्चे तेल का भंडारण करती आ रही है, जो भारत और यूएई के बीच मजबूत ऊर्जा कूटनीति का एक बेहतरीन उदाहरण है.
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कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित पाडुर रिजर्व भारत के पहले चरण का सबसे बड़ा तेल भंडारण स्थल है. ग्रेनाइट की मजबूत चट्टानों के बीच गहराई में बनी इस गुफा में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन तेल जमा करने की क्षमता है, जिसे चार अलगअलग कंपार्टमेंट में बांटा गया है. इसकी संरचनात्मक मजबूती को प्राकृतिक भूजल दबाव द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि चट्टान की किसी भी दरार से एक बूंद तेल भी बाहर न रिस सके.

पूर्वी समुद्र तट पर भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता को और अधिक बढ़ाने के लिए ओडिशा के चंडीखोल में एक नया और विशालकाय भंडार तैयार किया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आगामी सुविधा की क्षमता 4 मिलियन मीट्रिक टन होगी. यह प्रोजेक्ट सार्वजनिकनिजी भागीदारी मॉडल पर आधारित है, जहां वैश्विक कंपनियों को जगह किराए पर लेने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है. इसके पूरी तरह से चालू होने के बाद भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को एक अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूएई यात्रा ने केवल राजनयिक संबंधों को ही नहीं बल्कि भारत की लॉन्गटर्म ऊर्जा सुरक्षा योजनाओं को भी एक नई दिशा दी है. इस यात्रा के दौरान सबसे अहम समझौता इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच हुआ है. इस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के जरिए यूएई को भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार नेटवर्क में 30 मिलियन बैरल तक कच्चा तेल जमा करने का रास्ता मिल गया है.
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यह समझौता ऐसे बेहद संवेदनशील समय पर हुआ है जब अमेरिकाईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया सुलग रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली वैश्विक सप्लाई चेन पर भारी खतरा मंडरा रहा है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में वैश्विक आपूर्ति में कोई भी बाधा देश के लिए बड़ा संकट खड़ी कर सकती है. यूएई के साथ हुई यह डील इसी भेद्यता को कम करने और किसी भी आपात स्थिति में तेल की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए की गई है.

भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व असल में आपातकालीन कच्चे तेल के वो भंडार हैं, जिन्हें सरकार युद्ध, भूराजनीतिक संकट या वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल के दौरान देश की रक्षा के लिए बनाए रखती है. ये भंडार जमीन के काफी नीचे चट्टानों को काटकर बनाई गई बिना अस्तर वाली विशालकाय गुफाएं होती हैं, जिन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि किसी भी भीषण आपदा या युद्ध के दौरान वे सुरक्षित रहें.

इन सामरिक भंडारों का प्रबंधन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन ‘ISPRL’ द्वारा किया जाता है. ये तेल विपणन कंपनियों द्वारा अपने नियमित संचालन के लिए रखे जाने वाले सामान्य वाणिज्यिक भंडारों से बिल्कुल अलग हैं. सामरिक रिजर्व का इस्तेमाल केवल उन असाधारण और विकट परिस्थितियों में ही किया जाता है जब विदेशों से नियमित आयात करना लगभग असंभव या फिर बहुत अधिक महंगा हो जाता है. ये गुफाएं असल में भारत की ‘इमरजेंसी एनर्जी वॉल्ट’ हैं.

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