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पेट्रोल-डीजल महंगा होने से भड़के गिग वर्कर्स… 5 घंटे ठप रही डिलीवरी, जानें सरकार से क्या हैं मांगें

देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच अब ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सर्विस से जुड़े GIG वर्कर्स ने भी अपनी आवाज बुलंद कर दी है. शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक कई शहरों में GIG वर्कर्स ने सर्विस ऐप्स को बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया है. वर्कर्स की मांग है कि पेट्रोलडीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए उनके मानदेय यानी प्रति राइड और प्रति डिलीवरी मिलने वाले भुगतान को बढ़ाया जाए. 60 प्रतिशत GIG वर्कर्स ने हिस्सा लिया.

पेट्रोल-डीजल महंगा होने से भड़के गिग वर्कर्स… 5 घंटे ठप रही डिलीवरी, जानें सरकार से क्या हैं मांगें
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से भड़के गिग वर्कर्स… 5 घंटे ठप रही डिलीवरी, जानें सरकार से क्या हैं मांगें

वर्कर्स का कहना है कि कंपनियों की कमाई बढ़ रही है लेकिन उनकी आमदनी लगातार घटती जा रही है. GIG वर्कर यानी वो लोग जो ऑनलाइन ऐप्स के जरिए काम करते हैं. जैसे कैब ड्राइवर, बाइक टैक्सी राइडर, फूड डिलीवरी एजेंट और ग्रॉसरी डिलीवरी करने वाले कर्मचारी. दरअसल, देश में लाखों लोग Ola, Uber, Rapido, Swiggy, Zomato और दूसरी ऐप आधारित कंपनियों के जरिए रोज कमाई करते हैं.

इनकी कमाई पूरी तरह राइड और डिलीवरी पर निर्भर होती है. शनिवार को GIG वर्कर्स ने 12 बजे से 5 बजे तक ऐप बंद रखकर विरोध दर्ज कराया. वर्कर्स का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन उनके इंसेंटिव और बेस पे में कोई खास बदलाव नहीं किया गया.

GIG वर्कर्स के आरोप

राइडर्स का आरोप है कि पहले जहां छोटी दूरी की राइड पर 20 से 40 रुपये तक मिल जाते थे, वहीं अब कई बार 35 से 50 रुपये में ही राइड करनी पड़ती है. डिलीवरी एजेंट्स का कहना है कि एक ऑर्डर पर मिलने वाला भुगतान कई जगह घटाकर 20 से 30 रुपये तक कर दिया गया है. GIG वर्कर्स के मुताबिक एक राइडर रोजाना 10 से 14 घंटे तक सड़क पर रहता है. लेकिन बढ़ते ईंधन खर्च के बाद बचत लगातार कम होती जा रही है.

अगर कोई बाइक राइडर रोज 250 से 350 रुपये का पेट्रोल खर्च करता है, तो महीने में सिर्फ ईंधन पर ही 8 से 10 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं. इसके अलावा बाइक की EMI, सर्विसिंग, मोबाइल रिचार्ज और इंटरनेट का खर्च अलग होता है.

कम कमाई की वजह से बढ़ रहा आर्थिक दबाव

वर्कर्स का कहना है कि पहले जहां महीने में 15 से 25 हजार रुपये तक की बचत हो जाती थी, अब कई राइडर्स मुश्किल से 500 से 700 रुपये ही घर ले जा पा रहे हैं. वर्कर्स का कहना है कि अगर पेट्रोल और डीजल के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे और कंपनियों ने भुगतान नहीं बढ़ाया, तो कई लोगों के लिए यह काम जारी रखना मुश्किल हो जाएगा. कम कमाई की वजह से राइडर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.

कुछ वर्कर्स का कहना है कि कई बार उन्हें सिर्फ इंसेंटिव पूरा करने के लिए लगातार घंटों काम करना पड़ता है. इसका असर सीधे ग्राहकों पर भी पड़ सकता है. अगर बड़ी संख्या में राइडर्स और डिलीवरी एजेंट काम कम करते हैं, तो लोगों को कैब और डिलीवरी सेवाओं के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है.

GIG वर्कर्स की मुख्य मांगें हैं

  1. प्रति राइड और प्रति डिलीवरी भुगतान बढ़ाया जाए.
  2. पेट्रोलडीजल की कीमतों के हिसाब से फ्यूल अलाउंस दिया जाए.
  3. इंसेंटिव स्ट्रक्चर पारदर्शी बनाया जाए.
  4. लंबे समय तक काम करने वाले वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा और बीमा की बेहतर सुविधा मिले.
  5. वर्कर्स का कहना है कि ऐप कंपनियां किराया बढ़ाती हैं लेकिन उसका पूरा फायदा राइडर्स तक नहीं पहुंचता. राइडर्स को पूरा फायदा मिले.

प्रोटेस्ट से सरकार को जाएगा मैसेज

सुप्रीम कोर्ट के वकील जिया अली कबीर कहते हैं कि इधर GIG workers को मुख्य धारा में अभी तक नहीं जोड़ा गया है. लीगल ही कई PIL कोर्ट में है लेकिन उनमें समय लग रहा है. विदेश में सभी वर्कर्स का समान वेतनमान दिया जाता है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है. इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल जब सस्ता होता है तो सरकार सस्ता नहीं करती है पर जब महंगा होता है तो तुरंत आम आदमी पर बोझ डाल देती है. हम वर्कर्स की लड़ाई लड़ रहे हैं इस तरह से 5 घंटे के प्रोटेस्ट से सरकार को एक मैसेज जा रहा है.

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