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ठंड की मार झेलने के लिए नेचुरल फैब्रिक कैसे चुनें, योगगुरु स्वामी रामदेव ने बताया ठंड से बचने का आसान तरीका

स्वामी रामदेव से जानें नेचुरल फैब्रिक कैसे चुनें
Image Source : FREEPIK/PATANJALI

ठंड जब हद से गुजर जाए ना तो इंसान सबसे पहले जिस चीज की तरफ भागता है वो है रजाई, कंबल और सुकून भरी नींद। सर्द रातों में ये रज़ाई दिन भर की भागदौड़ से हुई बैचेनी और थकान को अपने अंदर समेट लेती है। लेकिन सवाल ये है जिस कंबल-रजाई में आप खुद को महफूज समझते हैं। वो वाकई सेहत के लिहाज से सेफ है भी या नहीं?एक वक्त था, जब घरों में रुई की रजाइयां होती थीं या फिर भेड़ और ऊंट के बालों से बने कंबल जो ठंड से भी बचाते थे और सेहत का भी ख्याल रखते थे। लेकिन धीरे-धीरे नानी-दादी की कंबल-रजाइयां अलमारियों से गायब हो गए। उनकी जगह आ गए खूबसूरत हल्के रंग-बिरंगे पॉलिस्टर और माइक्रोफाइबर वाले कमफर्टर-बैलेंकेट। लेकिन इन दिनों जब बैक टू बैसिक्स की बात हो रही है तो चर्चा ये भी है कि क्या ये माइक्रोफाइबर वाले कंबल-रजाइयां सेहत के लिए सही हैं ?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक पॉलिस्टर या माइक्रो-फाइबर कंबल हल्के और गर्म जरूर होते हैं लेकिन इन्हें बनाने में कुछ सिंथेटिक केमिकल्स इस्तेमाल होते हैं जैसे PFAS जिन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है। ये केमिकल्स शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलते। रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से किडनी-लिवर और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर बच्चों और अस्थमा के मरीजों पर खतरा ज्यादा होता है। एक और जरूरी बात पॉलिस्टर कंबल हवा को पास नहीं होने देते..पसीना अंदर ही फंसा रहता है। जिससे स्किन इरिटेशन, ईचिंग और सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। वहीं कॉटन की रजाई हवा पास होने देती है। पसीना सोखती है और स्किन को सांस लेने का मौका देती है। तो बात सीधी सी है रजाई-कंबल का काम सिर्फ गर्मी देना नहीं है, सेहत का ख्याल रखना भी है। अगर मुमकिन हो तो कॉटन या ऊनी रजाई चुनिए और अगर पॉलिस्टर कंबल इस्तेमाल करते हैं तो नये कंबल पहले हवा लगाइए, बार-बार धोइए और बच्चों के लिए हमेशा नेचुरल फैब्रिक ही चुनिए।

सिंथेटिक फैब्रिक के नुकसान से बचाए भुजंगासन

किडनी को स्वस्थ बनाता है।

लिवर से जुड़ी दिक्कत दूर होती है।

तनाव, चिंता, डिप्रेशन दूर करता है।

कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है।

फेफड़ों, कंधों, सीने को स्ट्रेच करता है।

रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

छाती चौड़ी होती है।

ताड़ासन के फायदे

ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है।

ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है।

दर्द-थकान मिटाने में मददगार।

रोज अभ्यास से लंबाई बढ़ती है।

दिल को मजबूत बनाता है।

तिर्यक ताड़ासन के फायदे

शरीर लचीला रहता है।

वजन घटाने के लिए कारगर।

ये आसन लंबाई बढ़ाता है।

दिल को मजबूत बनाता है।

वृक्षासन के फायदे

इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग करता है।

पैरों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।

सीने को चौड़ा और मजबूत करता है।

शरीर को लचीला बनाने में कारगर।

रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है।

सूर्य नमस्कार से लाभ

इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग करता है

एनर्जी लेवल बढ़ाने में सहायक

वजन घटाने में मददगार

शरीर को डिटॉक्स करता है

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

पाचन तंत्र बेहतर होता है

शरीर को ऊर्जा मिलती है

फेफड़ों तक पहुंचती है ज्यादा ऑक्सीजन

दंड-बैठक के लाभ

मसल्स को मजबूत बनाता है।

सीना और भुजाएं चौड़ी होती हैं।

हृदय रोग से बचा जा सकता है।

पैरों और जांघों को मजबूती मिलती है।

योगिक जॉगिंग के फायदे

बॉडी में एनर्जी आती है।

वज़न कम करने में मददगार।

शरीर मजबूत बनता है।

बॉडी फ्लेक्सिबल बनती है।

हाथ-पैर मजबूत होते हैं।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Satya Report किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

 

 

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