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Blood Sugar Management: डॉक्टरों के अनुसार रोज़ाना की ये आदतें साल भर कंट्रोल में रख सकती हैं ब्लड शुगर लेवल

डायबिटीज एक ऐसी क्रोनिक बीमारी है, जिसे पूरी तरह से खत्म करना भले ही मुमकिन न हो, लेकिन सही मैनेजमेंट के जरिए इसे हमेशा काबू में रखा जा सकता है। अक्सर मौसम बदलने, त्योहारों के खानपान या तनाव के कारण मरीजों का ब्लड शुगर अचानक स्पाइक कर जाता है। ऐसे में कई लोग इंटरनेट पर मिलने वाले किसी शॉर्टकट या चमत्कारी फॉर्मूले के चक्कर में पड़ जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। मेडिकल साइंस में डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो मौसम, तनाव, डाइट और व्यक्तिगत शारीरिक बदलावों के कारण लगातार ऊपरनीचे होती रहती है। डायबिटोलॉजिस्ट  Dr V Mohan का कहना है कि आज डायबिटीज़ मरीजों के पास स्मार्ट ग्लूकोमीटर, मोबाइल ऐप्स और आधुनिक दवाओं जैसे कई एडवांस टूल्स मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद ब्लड शुगर कंट्रोल करने में लोगों को दिक्कत हो रही है। 

Blood Sugar Management: डॉक्टरों के अनुसार रोज़ाना की ये आदतें साल भर कंट्रोल में रख सकती हैं ब्लड शुगर लेवल
Blood Sugar Management: डॉक्टरों के अनुसार रोज़ाना की ये आदतें साल भर कंट्रोल में रख सकती हैं ब्लड शुगर लेवल

शुगर कंट्रोल न होने की सबसे बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल है। एक्सपर्ट के अनुसार, लोग रोजमर्रा की उन बुनियादी आदतों से दूर होते जा रहे हैं जो डायबिटीज़ मैनेजमेंट की असली कुंजी हैं। उनका मानना है कि कुछ आसान और नियमित रूटीन अपनाकर ब्लड शुगर को काफी हद तक कंट्रोल में रखा जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि ब्लड शुगर को साल के 365 दिन एक सुरक्षित दायरे में रखने का कोई जादुई नुस्खा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और बेहद आसान लाइफस्टाइल नियम हैं जिन्हें अपनाने की जरूरत है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि पूरे साल कैसे डायबिटीज को कंट्रोल रखें।

परफेक्शन नहीं, नियमितता है जरूरी

डॉ. मोहन के मुताबिक डायबिटीज़ कंट्रोल करने के लिए किसी कठिन या फैंसी डाइट की जरूरत नहीं होती। सही समय पर खाना, संतुलित प्लेट लेना, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल करना ज्यादा असरदार साबित होता है। अल्ट्राप्रोसेस्ड और जंक फूड से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक भूखे रहकर बाद में ज्यादा खाना ब्लड शुगर के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। Harvard T.H. Chan School of Public Health की कई स्टडी बताती हैं कि ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए किसी ‘क्रैश डाइट’ यानी कठिन डाइट की तुलना में ‘सस्टेनेबल डाइट यानी ऐसी डाइट जिसे रोज फॉलो किया जा सके, उसका सेवन ज्यादा असरदार है। British Medical Journal में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड जैसे पैकेटबंद स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन टाइप2 डायबिटीज के खतरे को सीधे तौर पर बढ़ा देता है क्योंकि ये इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करते हैं।

हल्की एक्सरसाइज भी करती है बड़ा असर

बहुत से लोग मानते हैं कि सिर्फ कठिन वर्कआउट ही फायदेमंद होता है, जबकि ऐसा नहीं है। खाना खाने के बाद टहलना, हल्की स्ट्रेचिंग और रेगुलर मूवमेंट भी शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि रोज थोड़ीथोड़ी एक्सरसाइज करना, कभीकभार भारी वर्कआउट करने से ज्यादा लाभकारी है। Sports Medicine जर्नल में छपी एक मशहूर मेटाएनालिसिस Stitch Study के अनुसार, खाना खाने के ठीक बाद सिर्फ 2 से 5 मिनट की हल्की वॉक भी ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर को काफी हद तक कंट्रोल कर देती है।

सिर्फ एक रीडिंग देखकर न घबराएं

ब्लड शुगर की एक हाई रेटिंग को देखकर घबराना नहीं चाहिए। डॉ. मोहन बताते हैं कि कई मरीज घबराकर मॉनिटरिंग बंद कर देते हैं, जिससे धीरेधीरे कॉम्प्लिकेशंस बढ़ने लगते हैं। नियमित मॉनिटरिंग से शरीर के पैटर्न को समझने और बेहतर नियंत्रण में मदद मिलती है। Diabetes Care जर्नल की एक स्टडी के अनुसार, जो मरीज Continuous Glucose Monitor या नियमित ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करते हैं, वे अपने शरीर के ‘ग्लूकोज पैटर्न’ को बेहतर समझ पाते हैं। रिसर्च कहती है कि एक रीडिंग खराब आने पर पैनिक होने से कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज होता है, जो बचीखुची शुगर को और बढ़ा देता है। इसलिए पूरे हफ्ते का पैटर्न देखना जरूरी है, न कि एक सिंगल रीडिंग।

नींद और तनाव को हल्के में न लें

एक्सपर्ट के अनुसार खराब नींद और लगातार तनाव का सीधा असर इंसुलिन की कार्यक्षमता और वजन पर पड़ता है। पर्याप्त और गहरी नींद न मिलने पर ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए तनाव कम करना और अच्छी नींद लेना भी डायबिटीज मैनेजमेंट का अहम हिस्सा है। The University of Chicago की एक रिसर्च में पाया गया कि अगर स्वस्थ लोगों को भी लगातार कुछ दिनों तक सिर्फ 4 से 5 घंटे की नींद दी जाए, तो उनके शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी 40% तक कम हो जाती है और वे प्री डायबिटिक स्टेज में पहुंच जाते हैं। क्रोनिक स्ट्रेस  शरीर में ‘कोर्टिसोल’ और ‘एड्रिनेलिन’ हार्मोन छोड़ता है। ये हार्मोन लिवर में जमा ग्लूकोज को खून में रिलीज कर देते हैं, जिससे बिना कुछ मीठा खाए भी शुगर लेवल बढ़ जाता है।

दवाएं मदद करती हैं, लेकिन आदतों की जगह नहीं ले सकतीं

नई दवाएं ब्लड शुगर कंट्रोल करने, भूख कम करने और दिल की सेहत सुधारने में मदद कर सकती हैं। लेकिन डॉ. मोहन साफ कहते हैं कि अगर खानपान, एक्सरसाइज, नींद और तनाव जैसी बुनियादी चीजों पर ध्यान न दिया जाए, तो दवाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल आपकी जागरूकता और सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए है। यह किसी भी तरह से योग्य डॉक्टर या मेडिकल एक्सपर्ट की पेशेवर चिकित्सा सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। हर व्यक्ति का शरीर और उसकी मेडिकल कंडीशन अलग होती है। इसलिए, अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या किसी सर्टिफाइड डायबिटोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें।

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