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अखिलेश यादव ने माघ मेले में धरने पर बैठे शंकराचार्य से फोन पर की बात, कहा- मिलने आऊंगा

Prayagraj Magh Mela Shankaracharya Protest Akhilesh Yadav Show Support Palki Row

Magh Mela Controversy: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बातचीत कर अपना समर्थन जताया। अखिलेश यादव ने कहा कि वह जल्द ही उनसे मिलने प्रयागराज आएंगे और उनके साथ खड़े रहेंगे।

धरने पर बैठे शंकराचार्य ने अखिलेश से फोन पर बातचीत में कहा, अपनी लड़ाई हम अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब कोई बच्चा हिंदू धर्म में जन्म लेता है, तभी से उसे गंगा-यमुना में स्नान करने का अधिकार प्राप्त हो जाता है, लेकिन उनसे यह अधिकार भी छीन लिया गया। उन्होंने इसे परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।

क्यों बैठे हैं धरने पर?

दरअसल, माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पारंपरिक पालकी यात्रा के जरिए संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उनकी पालकी यात्रा को बीच रास्ते में रोक दिया और उन्हें जिस स्थान पर उतारा गया, वहीं छोड़ दिया। इसी के विरोध में शंकराचार्य उसी जगह पर धरने पर बैठ गए।

28 घंटे से अनशन, पानी तक त्याग

शंकराचार्य अपने पंडाल में नहीं बल्कि फुटपाथ पर ही धरने पर बैठे हुए हैं। वे रविवार रात से अब तक ठंड में धरना दे रहे हैं। मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज के मुताबिक, शंकराचार्य ने 28 घंटे से अनाज का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है और पानी तक छोड़ दिया है। उन्होंने सोमवार सुबह उसी स्थान पर पूजा और दंड तर्पण किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान

सोमवार दोपहर शंकराचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जब तक प्रशासनिक अधिकारी आकर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक वह अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, इतिहास में जब भी शंकराचार्य संगम स्नान के लिए गए हैं, पालकी में ही गए हैं। मैं प्रण करता हूं कि हर मेले में प्रयागराज आऊंगा, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं रुकूंगा। फुटपाथ पर ही व्यवस्था करूंगा।

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प्रशासन पर सवाल

अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी शंकराचार्य से मिलने नहीं पहुंचा है। इसके चलते साधु-संतों और श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मामला राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ता जा रहा है।

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