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पेन ड्राइव में कैद आश्रम के काले कारनामे आशुतोष महाराज का बड़ा खुलासा कहा कैमरे पर बताने लायक नहीं हैं गंदी चीजें

सहारनपुर : हुंचे आशुतोष महाराज ने स्वामी मुकुंदानंद, अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं.उन्होंने इन लोगों को ‘राक्षस’ और ‘कालनेमि’ करार देते हुए कहा कि ये धर्म का चोला पहनकर सनातन को बदनाम कर रहे हैं.पत्रकारों द्वारा पेन ड्राइव के बारे में पूछे जाने पर महाराज ने स्पष्ट किया कि “पेन ड्राइव में बहुत गंदी-गंदी चीजें हैं.” उन्होंने बताया कि इस पेन ड्राइव में आश्रम के अंदर होने वाले कुकर्मों और अय्याशी के इतने गंदे सीन मौजूद हैं कि उन्हें सार्वजनिक रूप से कैमरे के सामने बताया या दिखाया नहीं जा सकता.

उन्होंने दावा किया कि इन सभी काले कारनामों की सीडी (CD) और पेन ड्राइव के साथ-साथ आरोपियों (जैसे- प्रकाश उपाध्याय) की आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट्स भी सबूत के तौर पर उनके पास मौजूद हैं.आरोप है कि ये लोग सनातन धर्म के नाम पर विदेशों से भारी फंडिंग लेते हैं और दिल्ली से लेकर मठों और मेलों तक में बैठकर सनातन को बदनाम करने का काम करते हैं.

महाराज ने दावा किया है कि उनके पास इन सभी कृत्यों के पुख्ता सबूत हैं। उन्होंने मीडिया के सामने सीडी (CD) और पेन ड्राइव (Pen Drive) होने की बात कही है, जिसमें इन लोगों के काले कारनामों के वीडियो और चैट मौजूद हैं.

महाराज के अनुसार, आश्रम के अंदर एक ऐसा कमरा है जिसकी सुविधाएं अंबानी के घर से भी ज्यादा हैं। मीडिया में मामला उछलने के बाद वहां से ट्रकों में भरकर सामान रातों-रात हटाया जा रहा है.

आशुतोष ने बताया आश्रम में एक स्विमिंग पूल है जहां ये लोग ‘पूर्णिमा’ नाम की एक दक्षिण भारतीय महिला के साथ निर्वस्त्र होकर नहाते हैं। इस महिला को ये लोग अपनी सखी बताते हैं और उसे “स्वामी श्री” का नाम दिया गया है.

मेडिकल पुष्टि: उन्होंने दावा किया कि बटुकों (शिष्यों) के साथ हुए कुकर्म की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट्स में भी हो चुकी है। कुकर्म करने वालों में अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद, प्रकाश उपाध्याय और अरविंद का नाम मुख्य रूप से लिया गया है.

आश्रम में VVIP लोगों का आना-जाना लगा रहता है और उनके सामने भी यह सब परोसा जाता है.प्रकाश उपाध्याय की चैट्स में वीआईपी लोगों की पसंद-नापसंद का जिक्र है.

बच्चों की तस्करी: सबसे गंभीर आरोप यह है कि बाढ़ पीड़ित इलाकों से अनाथ या बेसहारा बच्चों को खरीद कर आश्रम लाया जाता है.इन बच्चों को आश्रम में पढ़ाया-लिखाया जाता है और 10 साल बाद जब वे बड़े हो जाते हैं, तो उनके साथ घिनौने काम (कुकर्म) किए जाते हैं.

महाराज ने बताया कि ऐसे लगभग 20 बच्चे हैं जो इस शोषण का शिकार हुए हैं। जब ये बच्चे विरोध करते हैं, तो उन्हें डरा-धमका कर शांत करा दिया जाता है.

माघ मेले के धरने के पीछे राजनीतिक साजिश
सपा-कांग्रेस का हाथ: महाराज ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी (अखिलेश यादव) और कांग्रेस के नेता इन लोगों का समर्थन कर रहे हैं.
डिप्टी सीएम की भूमिका: उन्होंने दावा किया कि माघ मेले में जो धरना प्रदर्शन हुआ, वह प्रायोजित था.

इसमें तत्कालीन डिप्टी सीएम और अखिलेश यादव की मिलीभगत थी ताकि माघ मेले की व्यवस्थाओं और सनातन को बदनाम किया जा सके.हिस्ट्रीशीटर बताए जाने पर महाराज ने चुनौती दी कि कोई भी कोर्ट का एक कागज दिखा दे जिसमें उन्हें सजा हुई हो.मुस्लिम अधिकारी द्वारा फंसाने का आरोप: उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर में जब उन्होंने हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था, तो उन्हें दबाने के लिए 2013 में अब्दुल अमीन नाम के एक मुस्लिम अधिकारी को तैनात किया गया था.

जिन मुकदमों में वे 2010 और 2002 में बरी हो चुके थे, उनकी सूची बनाकर उन्हें फर्जी तरीके से गुंडा एक्ट में फंसाने की कोशिश की गई, जिसे बाद में कमिश्नर ने खारिज कर दिया था.फर्जी मुहर और FIR: उन्होंने कहा कि 18 फरवरी को उनके खिलाफ कांधला थाने (शामली) की फर्जी मुहर और जाली दस्तावेजों (जिसमें उनके पिता का नाम राजेंद्र सिंह लिखा गया) के जरिए एक झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है, ताकि वे गौ-हत्या के खिलाफ आवाज न उठा सकें.

महाराज ने स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों पर अविश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें इन पर भरोसा नहीं है.उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच विश्व की सबसे बड़ी एजेंसी ‘स्कॉटलैंड यार्ड’ से कराई जाए।उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन लोगों ने 20 बच्चों के साथ कुकर्म किया है, उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए और अब राहुल गांधी या अखिलेश यादव भी इन्हें नहीं बचा पाएंगे.

 

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