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UGC नियमों पर पूछा सवाल…तो ‘हर-हर महादेव’ चिल्लाने लगे मोदी के मंत्री, सामने आया नित्यानंद राय का VIDEO

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Nityanand Rai Video: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए समानता नियमों को लेकर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। इस बीच जब केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से इस मामले पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सवालों का जवाब देने के बजाय ‘हर हर महादेव’ का जयकारा लगाना शुरू कर दिया। यह अब चर्चा का विषय बन गया है और उनका बयान सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर किया जा रहा है।

नित्यानंद राय दो दिन पहले बिहार के हाजीपुर में कौनहारा घाट गज-ग्रह मूर्ति के शिलान्यास समारोह में पहुंचे थे। इस कार्यक्रम के दौरान, पत्रकारों ने उनसे नए UGC नियमों को लेकर सवर्ण समुदाय में फैले गुस्से के बारे में पूछा। इसके बाद जो हुआ वह चर्चा का विषय बन गया।

सामने आया नित्यानंद राय का VIDEO

दरअसल, नित्यानंद राय ने सवाल का जवाब नहीं दिया और इसके बजाय जोर से “हर हर महादेव” का नारा लगा दिया। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, हरिहर नाथ, पटलेश्वर नाथ और भारत माता के जयकारे भी लगाए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

UGC ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी-एसटी और ओबीसी के छात्रों के साथ भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एक इक्विटी यूनिट स्थापित की जाएगी। अगर कोई छात्र जाति के आधार पर भेदभाव का सामना करता है तो वह शिकायत दर्ज करा सकता है। सवर्ण छात्र इन नियमों का विरोध कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया गया है।

UP में सियासी मुद्दा बने UGC नियम

इसके अलावा उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। इस मामले को लेकर बीजेपी में अंदरूनी कलह चल रही है, जिससे केंद्र सरकार पर UGC के नए नियमों में बदलाव करने का दबाव बढ़ रहा है। इस बीच, बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने हाल ही में मीडिया से कहा कि बिहार में नए UGC नियमों को लेकर कोई विवाद नहीं है।

क्या हैं यूजीसी के इक्विटी नियम?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। ये रेगुलेशन 13 जनवरी, 2026 को नोटिफाई किए गए थे और ये पिछले 2012 के रेगुलेशन की जगह लेंगे।

इन रेगुलेशन के तहत भेदभाव की शिकायतों को सुनने के लिए हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक समान अवसर केंद्र और एक इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य होगा। संस्थानों को 24×7 हेल्पलाइन, मॉनिटरिंग टीम और एक नियमित रिपोर्टिंग सिस्टम स्थापित करना होगा। अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे मान्यता रद्द होने, फंडिंग रोकने या अन्य दंड जैसे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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