मध्य प्रदेश : संस्कारधानी जबलपुर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों से रैगिंग के मामले में कॉलेज प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए वर्ष 2023 बैच के आठ एमबीबीएस छात्रों को छह महीने के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया है.साथ ही प्रत्येक छात्र पर 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है. मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सख्त चेतावनी भी दी है। कहा है कि भविष्य में यदि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति हुई तो संबंधित छात्रों को कॉलेज से बर्खास्त कर दिया जाएगा.

जांच में रैगिंग की पुष्टि कॉलेज की एंटी-रैगिंग समिति की ओर से की गई जांच में रैगिंग की पुष्टि हुई थी.इसी आधार पर कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया.जारी आदेश के अनुसार दोषी छात्रों को छह माह के लिए कक्षाओं के साथ ही हॉस्टल से भी निष्कासित किया गया है.यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.

कॉलेज की एंटी-रैगिंग समिति ने गहन जांच और साक्ष्यों के आधार पर नवदीप चौधरी, प्रकाश बावरिया, विक्रम सिंह मीणा, धर्मेंद्र कुशवाहा, केशव गौतम, सुदीप जायसवाल, नवनीत कुशवाहा और रवि मीणा को दोषी पाया. सजा के तौर पर इन सभी को 6 माह के लिए कक्षाओं से निष्कासित कर दिया गया है और इस दौरान वे हॉस्टल में भी कदम नहीं रख पाएंगे. इसके साथ ही अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रत्येक छात्र पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इस निलंबन का सबसे बड़ा असर यह होगा कि इन छात्रों का शैक्षणिक सत्र (Academic Session) पिछड़ जाएगा, जो उनके करियर के लिए एक बड़ा धब्बा साबित हो सकता है.

कानूनी पहलुओं पर नजर डालें तो भारत में रैगिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी (UGC) के बेहद सख्त नियम हैं. ‘राघवन समिति’ की सिफारिशों के बाद से रैगिंग को एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. जबलपुर मेडिकल कॉलेज की इस त्वरित कार्रवाई ने साबित किया है कि अब कॉलेज प्रबंधन केवल कागजी नोटिस तक सीमित नहीं हैं. समिति के अध्यक्ष डॉ. नटवरलाल अग्रवाल और सचिव डॉ. रुचिर खरे सहित पूरी टीम ने औचक निरीक्षण के जरिए छात्रों का पक्ष सुना और दोषियों को सफाई का मौका देने के बाद ही यह बड़ा फैसला सुनाया.
पीड़ित छात्र ने शिकायत में कहा था कि हॉस्टल क्रमांक चार से एमबीबीएस प्रथम वर्ष के बाद जब छात्र अन्य हॉस्टल्स में जाते हैं, तो वहां पहले से रह रहे सीनियर छात्र उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त करते हैं.
डीन की चेतावनी,
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे अन्य छात्रों के लिए एक चेतावनी बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल की पढ़ाई जैसा संवेदनशील पेशा अपनाने वाले छात्रों से उच्च स्तर के अनुशासन की उम्मीद की जाती है.
डॉ. सक्सेना ने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही दोषी छात्रों के परिजनों को कॉलेज बुलाकर उनकी काउंसलिंग की जाएगी. इस सख्त कदम का उद्देश्य कॉलेज परिसर में एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण तैयार करना है, ताकि नए छात्र बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें.



