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NASA के जेम्स टेलीस्कोप की बड़ी खोज, अंतरिक्ष में मिला 10,000 सूर्य से भी बड़ा ‘राक्षस तारा’


Science News: जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों को बहुत बड़े आदिम तारों के साफ सबूत मिले हैं जिन्हें कभी-कभी राक्षस तारे (Monster Stars) भी कहा जाता है. इस सबूत के मिलने से पिछले 2 दशकों से चली आ रही एक पहले का पक्का समाधान मिल गया है. माना जाता है कि इन तारों में से हर एक का वजन सूर्य से 1,000 से 10,000 गुना ज्यादा रहा होगा. ये तारे बिग बैंग के कुछ सौ मिलियन साल बाद ही बन गए होंगे. इन तारों की मौजूदगी अब केवल कल्पना भर नहीं है.

इस खोज से क्या साबित होता है?
ये संकेत यह बता सकते हैं कि ब्रह्मांड के शुरुआती समय में महाविशाल ब्लैक होल इतनी जल्दी कैसे दिखाई दिए थे. हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स और पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय ने मिलकर एक रिसर्च की है. इस रिसर्च में जीएस 3073 आकाशगंगा के अंदर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के रेशियो पर ध्यान दिया गया. उस आकाशगंगा में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात 0.46 है.

वैज्ञानिकों की जांच में क्या मिला?
द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में छपी रिसर्च के अनुसार, यह खास रासायनिक पैटर्न पक्के निशान का काम करता है. यह मजबूती से बताता है कि पुराने समय में बहुत बड़े तारे इस आकाशगंगा को समृद्ध करते थे. पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय के डैनियल व्हेलन ने कहा कि, हमारी यह नई खोज 20 साल पुराने ब्रह्मांडीय रहस्य को सुलझाने में मदद करती है. GS-3073 आकाशगंगा के साथ हमारे पास इन विशाल तारों के अस्तित्व का पहला सीधा सबूत है.

विशाल तारों की लाइफ साइकिल
इन नतीजों को और अच्छे से समझने के लिए रिसर्च टीम ने इन विशाल तारों के पूरे जीवन चक्र और उनके आस-पास के माहौल में होने वाले बदलावों का सिमुलेशन किया. मॉडलों से पता चलता है कि ये विशाल तारे अपने केंद्र में कार्बन बनाने के लिए हीलियम गैस को जलाते हैं. इसके बाद वह कार्बन बाहर की तरफ रिसता है और हाइड्रोजन जलाने वाली बारही परत में फैल जाता है.

कैसे बनता है नाइट्रोजन?
CNO चक्र नाम की प्रक्रिया के जरिए कार्बन हाइड्रोजन के साथ मिलकर नाइट्रोजन गैस बनाता है. संवहन धाराएं (Convection Currents) इन नाइट्रोजन को तारे के अंदर चारों ओर ले जाती है. समय के साथ यह नाइट्रोजन से भरा पदार्थ तारे के आसपास के अंतरिक्ष में फैल जाता है और अपने पीछे एक रासायनिक निशान (Chemical Imprint) छोड़ जाता है जो अरबों सालों तक बना रहता है.

क्या होता है ब्रह्मांडीय फिंगरप्रिंट?
स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के वैज्ञानिक देवेश नंदाल ने कहा कि, रासायनिक तत्वों की यह मात्रा एक ब्रह्मांडीय फिंगरप्रिंट की तरह काम करती है. जीएस 3073 में पाया गया पैटर्न किसी भी सामान्य तारे से मिलने वाले पैटर्न से पूरी तरह अलग है. उनका कहना है कि इसमें मौजूद बहुत ज्यादा नाइट्रोजन केवल एक ही तरह के सोर्स से मेल खाती है जिसे हम जानते हैं, ऐसे आदिम तारे जो हमारे सूर्य से हजार गुना विशाल थे. इससे हमें पता चलता है कि तारों की पहली पीढ़ी में वास्तव में बहुत बड़े पिंड शामिल थे.

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