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सरकारी आंकड़ों में बड़ा खुलासा, प्रोडक्शन को लगा झटका; इस सेक्टर को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

सरकारी आंकड़ों में बड़ा खुलासा, प्रोडक्शन को लगा झटका; इस सेक्टर को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

आईआईपी डेटा अक्टूबर 2025

IIP Data: अक्टूबर 2025 का महीना भारत के इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए कुछ खास अच्छा नहीं रहा. सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने इंडस्ट्रियल आउटपुट सिर्फ 0.4% बढ़ा, जबकि सितंबर में यह 4.6% की तेज रफ्तार से बढ़ा था. अर्थव्यवस्था की नब्ज बताने वाले इस इंडेक्स में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह त्योहारों का महीना, जिसमें कामकाजी दिनों की संख्या कम रही मानी जा रही है. दशहरा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के चलते कई फैक्ट्रियों में काम धीमा पड़ा और इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है.

बिजली उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट

इंडस्ट्री के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात रही बिजली उत्पादन में 6.9% की भारी कमजोरी. सामान्यतः अक्टूबर में तापमान गिरना शुरू होता है और बिजली की मांग पहले से कम हो जाती है. लेकिन इस बार कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बारिश लंबे समय तक जारी रही, जिससे ठंडक और बढ़ गई और पावर डिमांड और ज्यादा घटी. बिजली की कम खपत ने इंडस्ट्रियल गतिविधियों पर भी अप्रत्यक्ष असर डाला है.

कौन-से सेक्टर कितने मजबूत रहे?

अक्टूबर 2025 में इंडस्ट्रियल सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है. माइनिंग सेक्टर में 1.8% की गिरावट आई, यानी खनन गतिविधियां धीमी रही हैं. यह गिरावट पिछले कुछ महीनों से जारी कमजोर मांग और मौसमी प्रभावों की वजह से भी हुई है.
वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 1.8% की मामूली बढ़त दर्ज की है. त्योहारों में कम दिन होने के बावजूद इस सेक्टर ने कुछ स्थिरता दिखाई, क्योंकि कई कंपनियों में पहले से मौजूद ऑर्डर पूरे किए जा रहे थे.

IIP इंडेक्स के आंकड़े क्या कहते हैं?

अक्टूबर का कुल IIP इंडेक्स 150.9 रहा, जो पिछले साल अक्टूबर 2024 के 150.3 से बहुत थोड़ा ही ऊपर है. इन आंकड़ों से साफ है कि उत्पादन में बड़ी उछाल नहीं दिखी, लेकिन आंकड़े गिरावट के भी नहीं हैं.

IIP डेटा कैसे तैयार होता है?

इंडस्ट्रियल आउटपुट का आंकड़ा इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स (IIP) के आधार पर तय किया जाता है. यह डेटा देश भर की हजारों फैक्ट्रियों और उत्पादन केंद्रों से मिलता है. सरकार इसे पहले ‘क्विक एस्टिमेट’ के रूप में जारी करती है, जिसे बाद में जरूरत पड़ने पर रिवाइज किया जाता है. इसलिए अक्टूबर के ये आंकड़े भविष्य में थोड़ा ऊपर या नीचे हो सकते हैं.

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