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Budget 2026: हजारों करोड़ का निवेश, क्या भारत बनेगा ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब?

Budget 2026: हजारों करोड़ का निवेश, क्या भारत बनेगा ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब?

सेमीकंडक्टर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब यूनियन बजट 2026 पेश करने जा रही हैं, तब भारत का सेमीकंडक्टर सपना एक अहम मोड़ पर खड़ा है. सरकार ने कई नीतियां घोषित कीं, कुछ प्रोजेक्ट्स को मंजूरी भी मिली, लेकिन अब असली परीक्षा यह है कि क्या भारत इन योजनाओं को जमीन पर तेजी और लगातार अमल में ला पाएगा या नहीं.

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि भारत का लक्ष्य 2032 तक दुनिया के टॉप-4 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल होना है. उन्होंने बताया कि 2026 से चार कंपनियां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर देंगी, जिनमें माइक्रोन, टाटा, केन्स और CG सेमी जैसी कंपनियां शामिल हैं.

इन प्रोजेक्ट्स में हजारों करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है. गुजरात में माइक्रोन की यूनिट पर 22,500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहा है, जबकि टाटा और ताइवान की कंपनी PSMC मिलकर धोलेरा में करीब 91,000 करोड़ रुपये का बड़ा प्लांट लगाने जा रहे हैं. इसके अलावा असम, यूपी, ओडिशा और पंजाब में भी कई प्लांट प्रस्तावित हैं.

बजट की भूमिका अहम

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाला बजट तय करेगा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) सिर्फ सब्सिडी स्कीम बनकर रह जाएगा या फिर एक मजबूत, लंबी अवधि की इंडस्ट्रियल स्ट्रैटेजी बनेगा. PwC इंडिया के सुजय शेट्टी के मुताबिक, अगले पांच साल में भारत की घरेलू चिप डिमांड दुनिया की कुल मांग का करीब 10% हो सकती है. यानी देश के पास खुद मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने का बड़ा मौका है. लेकिन इसके लिए सरकार को इंसेंटिव स्कीम जारी रखनी होगी, नहीं तो कंपनियां दूसरे देशों की ओर रुख कर सकती हैं.

सब्सिडी और सपोर्ट क्यों जरूरी

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगाना बेहद महंगा काम है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिजली-पानी जैसी रियायतों से ज्यादा जरूरी है कि सरकार सीधी कैपिटल सब्सिडी दे, ताकि कंपनियों को शुरुआत में राहत मिले. साथ ही, डिजाइन से जुड़े स्टार्टअप्स को भी ज्यादा सपोर्ट देने की जरूरत बताई जा रही है, क्योंकि भारत के पास डिजाइन टैलेंट काफी मजबूत है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल की कमी

एक बड़ी समस्या यह भी है कि कई राज्यों में सेमीकंडक्टर के लायक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे जमीन, पानी, बिजली और लॉजिस्टिक्स अभी कमजोर है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि केंद्र सरकार को राज्यों के साथ मिलकर क्लस्टर बनाने चाहिए, जहां पूरी सप्लाई चेन विकसित हो सके. इसके अलावा इंजीनियर, टेक्नीशियन और स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करना भी बेहद जरूरी है. इसके लिए इंडस्ट्री और यूनिवर्सिटी के बीच मजबूत साझेदारी की जरूरत बताई जा रही है. कुल मिलाकर, बजट 2026 भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए एक लिटमस टेस्ट साबित हो सकता है. दुनिया की नजर इस पर होगी कि क्या भारत सिर्फ घोषणाएं करेगा या सच में एक मजबूत ग्लोबल चिप हब बनने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा.

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