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Budget 2026: क्या भारत बनेगा दुनिया का नया टेक हब? AI-ड्रोन और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए हो सकते हैं बड़े ऐलान

Budget 2026: क्या भारत बनेगा दुनिया का नया टेक हब? AI-ड्रोन और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए हो सकते हैं बड़े ऐलान

Budget 2026 Tech Expectations

Budget 2026 Tech Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 के पिटारे से इस बार तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं. सरकार का पूरा फोकस भारत को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘ड्रोन हब’ बनाने पर है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट का मानना है कि इस बजट में डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे और डीप टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए जा सकते हैं. यह बजट न केवल डिजिटल इंडिया को नई रफ्तार देगा, बल्कि मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग साबित होगा.

एआई और डेटा सेंटर पर फोकस

भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में ग्लोबल लीडर बनाने के लिए बजट 2026 में ‘इंडिया एआई मिशन’ के लिए फंड को बढ़ाया जा सकता है. सरकार का मुख्य इरादा बड़े-बड़े एआई डेटा सेंटर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, ताकि देश के पास अपनी खुद की सुपरकंप्यूटिंग ताकत हो. इसके लिए डेटा सेंटर्स को ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ का दर्जा मिलने की उम्मीद है, जिससे कंपनियों को कम ब्याज पर लोन और टैक्स में राहत मिल सकेगी. यह कदम न केवल तकनीक को मजबूत करेगा बल्कि हमारे डेटा को देश के भीतर ही सुरक्षित रखने में मदद करेगा.

ड्रोन और डीप टेक को नई उड़ान

इस बजट में एक नई ‘ड्रोन’ स्कीम के आने की पूरी संभावना जताई जा रही है. सरकार ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और उसके पार्ट्स की यूनिट लगाने वाली कंपनियों को ‘कैपेक्स इनसेंटिव’ यानी शुरुआती निवेश में बड़ी छूट दे सकती है. डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए भी खास फंड बनाया जा सकता है ताकि रोबोटिक्स और स्पेस टेक जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवा नए प्रयोग कर सकें. ड्रोन सेक्टर में आत्मनिर्भरता आने से कृषि, डिफेंस और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा और छोटे शहरों में मैन्युफैक्चरिंग हब विकसित होंगे.

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स में बड़ी राहत

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को दुनिया के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार पीएलआई (PLI) स्कीम को अगले 4 साल के लिए और बढ़ा सकती है. सबसे बड़ी राहत मोबाइल के पार्ट्स पर मिलने वाली ‘कस्टम ड्यूटी’ में कटौती के रूप में आ सकती है. अगर कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले और स्पीकर जैसे पार्ट्स पर ड्यूटी घटती है, तो भारत में मोबाइल बनाना और भी सस्ता हो जाएगा. इसका सीधा फायदा आम आदमी को सस्ते स्मार्टफोन के रूप में मिलेगा और साथ ही ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों का विदेशों में निर्यात भी तेजी से बढ़ेगा. फिलहाल भारत में आईफोन का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है. भारत से अमेरिका और अन्य देशों में भी आईफोन निर्यात हो रहे हैं.

कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम

इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव स्कीम) स्कीम का बजट दोगुना करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. सरकार चाहती है कि हम सिर्फ विदेशों से सामान लाकर यहां असेंबल न करें, बल्कि चिप्स और अन्य छोटे कंपोनेंट्स भी भारत में ही बनें. स्टार्टअप्स के लिए नियमों को सरल बनाने और उन्हें रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए टैक्स छूट देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

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