सूरजपुर : प्रतापपुर क्षेत्र में रात्रि कालीन अवैध रूप से मकान तोड़े जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है.जगन्नाथपुर क्षेत्र में बीती 25 मार्च की मध्य रात्रि कथित रूप से एसईसीसीएल (SECL) और पुलिस की कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया.
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की.
ग्रामीणों का आरोप है कि स्वर्गीय माखन मिंज के वारिस परिवार, जिसमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य मंजू मिंज भी शामिल हैं, के मकान को बिना किसी पूर्व सूचना के देर रात पुलिस बल की मौजूदगी में मशीनों से तोड़ दिया गया.
बताया जा रहा है कि उस समय परिवार के लोग घर के भीतर सो रहे थे और अचानक चारों ओर से पुलिस ने घर को घेर लिया, जिसके बाद तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई. पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्रवाई के दौरान घर में रखे कीमती सामान, नकदी, जेवर, जरूरी दस्तावेज और यहां तक कि मवेशियों का भी कोई पता नहीं चल पाया है.
ग्रामीणों ने एसईसीसीएल और पुलिस पर मिलीभगत कर पूरे सामान को गायब करने का गंभीर आरोप लगाया है.इसके अलावा आसपास के गांवों—मदन नगर, कनक नगर, सिलफिली, गुदरूदर और बोझ—के लोग भी इस घटना से आक्रोशित होकर आंदोलन में शामिल हुए.
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय और उग्र हो गई जब एसडीएम कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी मौजूद नहीं थे। गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे तहसीलदार को ज्ञापन देने से इनकार कर दिया और अंततः एसडीएम कार्यालय के बाबू को ही ज्ञापन सौंपा. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि जानबूझकर जिम्मेदार अधिकारी मौके से अनुपस्थित रहे, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया.
इस दौरान पूर्व जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने भी मंच संभालते हुए प्रशासन और एसईसीसीएल पर जमकर हमला बोला। पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी परिवारों पर जबरन दबाव बनाकर उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है.उन्होंने आरोप लगाया कि रात के समय इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह असंवैधानिक है और यह सीधे-सीधे गरीबों पर अत्याचार है.
वहीं पूर्व मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आखिर किसके आदेश पर रात के अंधेरे में मकानों को ध्वस्त किया गया.उन्होंने कहा कि कानून भी रात में इस तरह की कार्रवाई की अनुमति नहीं देता, फिर भी पुलिस और एसईसीसीएल ने मिलकर मनमानी की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा.
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर एसईसीसीएल का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए तीखी नारेबाजी की और उन्हें “दलाल” तक कह दिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे.
ग्रामीणों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो 26 मार्च को जगन्नाथपुर खदान के मुख्य द्वार के सामने चक्का जाम किया जाएगा.साथ ही कोयला परिवहन और उत्पादन को अनिश्चितकाल के लिए रोकने का भी ऐलान किया गया है.
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.



