धमतरी : गर्मी बढ़ते ही बाजार में बिक रहे शीतल पेयों की सच्चाई ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है.के निर्देश पर जिले में चल रहे विशेष जांच अभियान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा.कार्रवाई में जो खुलासे हुए हैं, वे सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरे की ओर इशारा करते हैं.
बस स्टैंड के पास ‘पवित्र जल’ निकला अपवित्र!
धमतरी के व्यस्त बस स्टैंड इलाके में संचालित ‘पवित्र जल’ नाम की पानी पाउच यूनिट पर जब टीम ने दबिश दी, तो हकीकत सामने आ गई. बिना किसी वैध लाइसेंस के चल रही इस इकाई को तत्काल सील कर दिया गया.सवाल यह उठता है कि आखिर बिना अनुमति के यह कारोबार कब से चल रहा था और जिम्मेदार विभाग अब तक अनजान क्यों था?
‘ओसेनो’ ब्रांड में भी बड़ा खेल
जांच में ‘ओसेनो’ ब्रांड के पानी पाउच भी संदेह के घेरे में आए। पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी जैसी जरूरी जानकारी गायब मिहै. यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ खुला धोखा माना जा रहा है.विभाग ने तत्काल जब्ती और बिक्री पर रोक लगा दी है.
जूस नहीं, ‘रंगीन जहर’ परोसा जा रहा था!
शांति कॉलोनी के ‘गोलू फल भंडार’ में जो मिला, उसने जांच टीम को भी हैरान कर दिया.आम के जूस को आकर्षक बनाने के लिए उसमें ‘गाय छाप’ अखाद्य रंग मिलाया जा रहा था—ऐसा रंग जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है.मौके पर सैंपल लेकर केस दर्ज किया गया है और अब मामला न्यायालय तक जाएगा.
अभियान के दौरान सिंहावा मिनरल्स और भोजवानी आइस फैक्ट्री सहित कई इकाइयों से नमूने लिए गए हैं.लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ एक दिन की कार्रवाई है, या लंबे समय से चल रहे मिलावट के ‘नेटवर्क’ की झलक?
कड़ी चेतावनी, लेकिन क्या बदलेगा हालात?
खाद्य विभाग ने साफ कर दिया है कि के तहत दोषियों को जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही सभी आइस फैक्ट्रियों और वाटर प्लांट्स को नोटिस जारी कर सख्त निर्देश दिए गए हैं.प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सस्ते और बिना लेबल वाले उत्पादों से बचें। क्योंकि सवाल सिर्फ स्वाद का नहीं, आपकी सेहत और जिंदगी का है.



