DharamIndia

चैती छठ 2026: आज सूर्य देव को दिया जाएगा ‘संध्या अर्घ्य’, नोट कर लें अपने शहर में सूर्यास्त का सही समय और पूजा की विधि

चैती छठ 2026: आज सूर्य देव को दिया जाएगा ‘संध्या अर्घ्य’, नोट कर लें अपने शहर में सूर्यास्त का सही समय और पूजा की विधि

Chhath Vrat Rules: चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. दूसरे दिन यानी खरना का अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हो चुका है और अब आज छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन है संध्या अर्घ्य. इस दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं. इस बार विशेष बात यह है कि आज के दिन रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग का अद्भुत संयोग भी बन रहा है, जो इस पूजा के महत्व को और अधिक बढ़ा रहा है. आइए जानते हैं संध्या अर्घ्य का समय, पूजा विधि और जरूरी नियमों के बारे में.

खरना के साथ शुरू हुआ निर्जला उपवास

चार दिवसीय इस महापर्व के दूसरे दिन यानी सोमवार को व्रतियों ने खरना का अनुष्ठान पूरा किया. शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू हो गया है, जो बुधवार सुबह सूर्योदय के बाद पारण के साथ संपन्न होगा.

संध्या अर्घ्य: शुभ मुहूर्त (24 मार्च 2026)

आज चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि है. आज शाम को अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा.

विशेष संयोग: आज पूजा के समय रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग विद्यमान रहेगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद कल्याणकारी माना गया है.

पूजा की विधि और सामग्री

  • प्रमुख प्रसाद: गेहूं के आटे और गुड़ से बना पारंपरिक ठेकुआ, चावल के लड्डू (लडुवा), और पूरी.
  • फल एवं सब्जियां: नींबू, केला, सिंघाड़ा, गन्ना, सुथनी, शकरकंद और मौसमी फल.
  • अन्य सामग्री: नारियल, अगरबत्ती, मिट्टी का दीपक, सिंदूर और अक्षत.

विधि: व्रती पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य की ओर मुख करते हैं. सूप में सभी पूजन सामग्री सजाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और छठी मैया के गीत गाकर संतान की लंबी आयु व सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.

छठ पूजा के जरूरी नियम

  • स्वच्छता का महत्व: छठ पूजा में सफाई का सबसे अधिक महत्व है. प्रसाद बनाने वाली जगह से लेकर बर्तनों तक, सब कुछ बिल्कुल नया या पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए.
  • सात्विक आहार: व्रत के दौरान घर में लहसुन और प्याज का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहता है.
  • बिस्तर पर नहीं सोते हैं: उपवास के दौरान व्रती जमीन पर कंबल या चटाई बिछाकर सोते हैं.
  • वाणी पर संयम: इस दौरान व्रती को शांत रहकर छठी मैया का ध्यान करना चाहिए और किसी के प्रति कटु वचन नहीं बोलने चाहिए.

कल होगा महापर्व का समापन

कल यानी 25 मार्च को चैत्र शुक्ल सप्तमी के दिन उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाएगा. इसके बाद व्रती कच्चे दूध और प्रसाद के साथ अपना व्रत खोलेंगे, जिसके साथ ही इस चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा.

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply