
Raj Kundra Bitcoin Scam: मुंबई की एक विशेष अदालत ने कथित बिटकॉइन घोटाले के मामले में व्यवसायी राज कुंद्रा को समन जारी किया है। अदालत ने कहा है कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही करने हेतु प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
पीएमएलए मामलों के विशेष न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर बी रोटे ने राज कुंद्रा और दुबई स्थित व्यवसायी राजेश सतीजा को समन जारी करते हुए 19 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा है।
आरोपी: पिछले साल सितंबर में संघीय जांच एजेंसी (ED) द्वारा दायर पूरक आरोप पत्र (Supplementary Charge Sheet) में इन दोनों को आरोपी बनाया गया था।
अदालत की टिप्पणी: अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान, अभियोजन पक्ष की शिकायत (आरोप पत्र) और मामले के रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह सिद्ध होता है कि कुंद्रा और सतीजा पीएमएलए के तहत दंडनीय अपराधों में संलिप्त थे। ईडी ने संज्ञान लेने और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया है।
‘गेन बिटकॉइन पोंजी घोटाले’ से कनेक्शन
यह मामला ‘गेन बिटकॉइन पोंजी घोटाले’ से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, राज कुंद्रा ने इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता और प्रवर्तक अमित भारद्वाज से यूक्रेन में ‘बिटकॉइन माइनिंग फार्म’ स्थापित करने के लिए 285 बिटकॉइन प्राप्त किए थे।
वर्तमान मूल्य: चूंकि यह सौदा पूरा नहीं हुआ, इसलिए कुंद्रा के पास अब भी 285 बिटकॉइन हैं, जिनकी वर्तमान कीमत ₹150 करोड़ रुपये से अधिक है।
मध्यस्थता का दावा खारिज: कुंद्रा ने उक्त लेनदेन में केवल मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने का दावा किया है, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया है।
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कोर्ट का निष्कर्ष: उनके और महेंद्र भारद्वाज के बीच ‘टर्म शीट’ नामक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि समझौता वास्तव में राज कुंद्रा और अमित भारद्वाज (उनके पिता महेंद्र भारद्वाज) के बीच हुआ था। इस प्रकार, कुंद्रा का मध्यस्थ का तर्क मान्य नहीं है।
सबूत छिपाने के आरोप
2018 से कई अवसरों के बावजूद, कुंद्रा लगातार उन ‘वॉलेट एड्रेस’ (एक तरह का डिजिटल पता) को उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं, जहां 285 बिटकॉइन स्थानांतरित किए गए थे।
बहाना: उन्होंने जानकारी न मिलने का कारण अपने आईफोन-10 के खराब हो जाने को बताया।
ईडी का रुख: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसे सबूत नष्ट करने और अपराध से अर्जित धन को छिपाने की जानबूझकर की गई कोशिश माना है।



