
दिल्ली हाई कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण के बेटे अकिरा नंदन के नाम, व्यक्तित्व और छवि का दुरुपयोग करने वाली एक AI-जनरेटेड फिल्म के प्रसारण और प्रसार पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति तुषार ताओ गडेला, अकिरा नंदन उर्फ अकिरा देसाई द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सांभवामी स्टूडियोज एलएलपी ने यूट्यूब पर करीब एक घंटे की फिल्म अपलोड की, जिसे कथित तौर पर “दुनिया की पहली ग्लोबल एआई फिल्म” बताया गया और उसमें अकिरा नंदन को मुख्य भूमिका में दिखाया गया, जबकि इसके लिए उनसे किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी।
याचिका में कहा गया कि उक्त AI कंटेंट में अकिरा नंदन से जुड़ी गढ़ी हुई अंतरंग और रोमांटिक दृश्य भी दिखाए गए हैं, जिससे उनकी निजता, व्यक्तित्व अधिकार और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। अदालत ने कहा कि इस तरह का कंटेंट न केवल वादी की छवि, नाम और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है, बल्कि उनके व्यक्तित्व से जुड़े कॉपीराइट का भी उल्लंघन करता है।
अदालत के अनुसार, एआई और डीपफेक तकनीक के कथित दुरुपयोग से अकिरा नंदन के व्यक्तित्व अधिकार, नैतिक अधिकार, प्रचार अधिकार और निजता के अधिकार का हनन हुआ है। इसके साथ ही यह आम जनता को गुमराह करने का भी प्रयास है।
23 जनवरी को पारित अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि वादी एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं और आंध्र प्रदेश के मनोरंजन जगत में उनकी विशिष्ट पहचान है। अदालत ने कहा कि एआई टूल्स के जरिए उन्हें मुख्य भूमिका में दिखाकर फिल्म बनाना उनके नाम, छवि, आवाज और व्यक्तित्व के व्यावसायिक शोषण की ओर इशारा करता है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इस मामले में रोक नहीं लगाई गई, तो वादी को होने वाली क्षति की भरपाई पैसों में नहीं की जा सकती और न ही उनकी छवि को आसानी से पुनर्स्थापित किया जा सकता है।
इसके बाद कोर्ट ने एकतरफा अंतरिम राहत देते हुए फिल्म और उससे जुड़े सभी ऑनलाइन कंटेंट को तत्काल हटाने का आदेश दिया। साथ ही प्रतिवादियों को अकिरा नंदन के नाम, छवि, आवाज, हाव-भाव या किसी भी पहचान योग्य विशेषता का एआई, जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग या डीपफेक तकनीक के जरिए किसी भी रूप में उपयोग करने से रोक दिया।
कोर्ट ने फिल्म से जुड़े क्लिप्स, शॉर्ट्स और प्रचार सामग्री को सभी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा, अदालत ने मेटा प्लेटफॉर्म्स (प्रतिवादी संख्या 3) को आदेश दिया कि वह 72 घंटे के भीतर उल्लंघन करने वाले यूआरएल्स को हटाने के लिए संबंधित यूजर को सूचित करे। यदि यूजर ऐसा नहीं करता है, तो मेटा को स्वयं कंटेंट हटाना होगा। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को तय की गई है।



