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शराब घोटाले के ट्रायल को छत्तीसगढ़ शिफ्ट करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

शराब घोटाले के ट्रायल को छत्तीसगढ़ शिफ्ट करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले के मुकदमे को ट्रांसफर करने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने सह-आरोपियों को होने वाली संभावित मुश्किलों पर चिंता जताई. इस घोटाले में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश दोनों जगह FIR दर्ज की गई है.

याचिका में उत्तर प्रदेश में दर्ज मामले को छत्तीसगढ़ स्थानांतरित करने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल खड़े किए. कोर्ट ने कहा कि इससे मामले में अन्य सह-आरोपियों को परेशानी होगी. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने, शराब घोटाले के मामले में आरोपी छत्तीसगढ़ सरकार के रिटायर्ड अधिकारी निरंजन दास की ओर से पेश हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी और शोएब आलम की दलीलें सुनी. निरंजन दास ने उत्तर प्रदेश में दर्ज मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ ट्रांसफर करने की मांग की है.यह तर्क देते हुए कि दोनों राज्यों में आरोप काफी हद तक समान हैं और एक ही साजिश का हिस्सा हैं.

‘सह-आरोपियों को हो सकती है दिक्कत’

CJI ने कहा,’आप कह रहे हैं कि दोनों राज्यों में आरोप समान हैं. लेकिन कोऑर्डिनेट बेंच का कहना है कि वे राज्य-विशिष्ट है’. बेंच ने उन व्यावहारिक मुश्किलों की ओर भी इशारा किया जो उत्तर प्रदेश की FIR में ट्रायल ट्रांसफर करने पर पैदा हो सकती हैं. कोर्ट ने कहा कि त्तर प्रदेश में भी मामले के सह-आरोपी हैं, और मामला स्थानांतरित करने से उन्हें दिक्कत हो सकती है.

CJI ने किया सवाल

CJI ने सवाल किया कि अगर कोई सह-अभियुक्त नोएडा का स्थायी निवासी है तो उसका क्या होगा?. ‘अगर वह कहे कि मुझे रायपुर नहीं बुलाया जाए, बल्कि मुकदमा नोएडा में में चले, तो क्या होगा? ये परस्पर-विरोधी मांगें हैं’. इसके जवाब में, रोहतगी ने कहा कि उक्त सह-आरोपी छत्तीसगढ़ में भी कार्रवाई का सामना कर रहा है और इसलिए उसे वहां भी ट्रायल का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, बेंच ने दोहराया कि एक आरोपी को राहत देने से दूसरे को कठिनाई हो सकती है.

‘कोर्ट सीमित राहत देने पर विचार कर सकती है’

CJI ने संकेत दिया कि कोर्ट सीमित राहत देने पर विचार कर सकती है जैसे कि शारीरिक रूप से उपस्थित होने की बाध्यता से छूट,, लेकिन ट्रायल ट्रांसफर जैसे आदेश से सावधानी बरतनी होगी.कोर्ट ने कहा ‘हम ऐसा आदेश न दे दें जिससे सह-अभियुक्तों को गंभीर कठिनाई हो’. रोहतगी ने अनुरोध किया कि अदालत अन्य आरोपियों को भी सुन ले, क्योंकि आदेश का असर उन पर भी पड़ेगा. कोर्ट ने निर्देश दिया कि तीनों संबंधित मामलों को एक साथ टैग किया जाए और इन पर 19 जनवरी को संयुक्त रूप से सुनवाई की जाए.

कांग्रेस सरकार के समय हुआ था घोटाला

जांच एजेंसियों के मुताबिक, राज्य में शराब घोटाला 2019 और 2022 के बीच भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के समय में हुआ था. उनका कहना है कि इस कथित घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबें भरी गईं. कथित घोटाले का मुख्य मकसद राज्य की आबकारी नीति में हेरफेर करना था.

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