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कब्ज की समस्या को न समझें सामान्य, एक्सपर्ट बता रहे हैं Constipation में स्थिति कब सर्जरी तक पहुंच जाती है?

कब्ज की सर्जरी कैसे होती है
Image Source : FREEPIK

कब्ज को आमतौर पर लोग पाचन समस्या मानते हैं, जो गलत खानपान, कम पानी पीने के कारण हो जाती है। दिल्ली में स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, में सीनियर कंसल्टेंट – जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी,  डॉ. अनिल मलिक, कहते हैं कि कुछ गंभीर स्थितियों में जब कब्ज लंबे समय तक बना रहता है तब आंतों पर दबाव पड़ने लगता है। इससे मल सख्त होकर आंतों में जमा हो जाता है जिससे बॉवेल मूवमेंट प्रभावित होती है।

कब पड़ सकती है सर्जरी की ज़रूरत?

  • आंतों में रुकावट: अगर मल बहुत ज्यादा सख्त होकर आंत में फंस जाए या आंत किसी वजह से संकरी हो जाए, तो आंतों में रुकावट पैदा हो सकती है। इस स्थिति में पेट में तेज दर्द, सूजन, उल्टी और कई दिनों तक शौच न होना जैसे लक्षण दिखते हैं। जब दवाओं और एनिमा से भी मल नहीं निकलता, तब जनरल सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

  • फीकल इम्पैक्शन: फीकल इम्पैक्शन तब होता है जब मल आंत या मलाशय में पत्थर की तरह सख्त होकर जम जाता है। यह बुजुर्गों, लंबे समय से बिस्तर पर पड़े मरीजों और लंबे समय तक कब्ज झेल रहे लोगों में ज्यादा देखा जाता है। शुरुआत में दवाओं से इलाज किया जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में सर्जिकल हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है।

  • पाइल्स, फिशर और फिस्टुला: लगातार जोर लगाकर शौच करने से पाइल्स (बवासीर), एनल फिशर और फिस्टुला जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शुरुआती स्टेज में इनका इलाज दवाओं से संभव है, लेकिन जब दर्द, खून बहना और इंफेक्शन बढ़ जाता है, तब सर्जरी ही एकमात्र विकल्प रह जाता है। यह सभी समस्याएं कब्ज से सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं।

  • हर्निया की स्थिति बिगड़ना: कब्ज के दौरान बार-बार जोर लगाने से पेट की दीवार कमजोर हो सकती है, जिससे हर्निया की समस्या पैदा हो सकती है या पहले से मौजूद हर्निया बिगड़ सकता है। अगर हर्निया फंस जाए, तो यह इमरजेंसी सर्जरी का मामला बन जाता है।

  • पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ: पुरानी कब्ज़ से पेट  सूजन, अल्सर, डायवर्टीकुलम और डायवर्टीकुलिटिस या ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है। कुछ मामलों में, कब्ज़ कोलन कैंसर का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। ऐसी स्थितियों में, प्रभावित हिस्से को सर्जरी से हटाना ज़रूरी हो जाता है।

कैसे करें  बचाव?

अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, में सीनियर कंसल्टेंट – बैरिएट्रिक, जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, डॉ. अतुल सरदाना, कहते हैं कि जब कब्ज दवाओं, सही डाइट और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद ठीक न हो या इसके साथ तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, मल में खून आना, बिना वजह वजन तेजी से कम होना या आंतों में रुकावट जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तब सर्जरी पर विचार किया जाता है। ऐसी स्थिति में देरी करना खतरनाक हो सकता है। वहीं, कब्ज को सर्जरी तक पहुँचने से रोकने के लिए रोजाना फाइबर युक्त भोजन लेना, पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना और समय पर शौच की आदत डालना बेहद जरूरी है। अगर कब्ज बार-बार हो रही है समय पर इलाज से बड़ी सर्जरी से बचा जा सकता है। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Satya Report किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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