

डीएसपी तंजील हत्याकांड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फांसी की सजा पाए रेयान को बरी कर दिया है। जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। हाई कोर्ट ने निचली अदालत से दोषा करार दिए गए रेयान को सभी आरोपों से बरी कर रिहा करने का आदेश दिया है। यह मामला साल 2016 का है।
जानकारी के मुताबिक, दो अप्रैल 2016 को बिजनौर के सहसपुर निवासी एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की बिजनौर स्योहारा क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप रेयान पर लगे थे। निचली अदालत ने आरोपी मुनीर और रेयान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था। अपील लंबित रहने के दौरान अपीलकर्ता मुनीर की मौत हो चुकी है। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
मामले के विवरण के अनुसार, अप्रैल 2016 में NIA अधिकारी तंज़ील अहमद और उनकी पत्नी फ़रज़ाना बिजनौर ज़िले के कस्बा स्योहारा में एक शादी में शामिल होने गए थे। जब वे अपनी कार से जा रहे थे, तो बाइक पर सवार दो हमलावरों रेयान और मुनीर ने उनकी कार को ओवरटेक किया और कथित तौर पर उन पर कई गोलियां चलाईं। तंज़ील की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि फ़रज़ाना घायल हो गईं और 10 दिन बाद उनकी भी मौत हो गई। उस समय, तंज़ील NIA में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस के पद पर तैनात थे और आतंकवाद से जुड़े कई मामलों की जांच कर रहे थे।
ट्रायल कोर्ट ने कुल 19 गवाहों के बयान दर्ज किए, जिनमें तंज़ील के भाई रागिब मसूद, चश्मदीद हसीब (जिन्होंने मौके पर आरोपियों की मौजूदगी और गोलीबारी की घटना की पुष्टि की), और दिवंगत अधिकारी की बेटी शामिल थीं। 2022 में सेशंस कोर्ट ने रेयान और मुनीर को हत्या का दोषी ठहराया और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।



