
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले देश का आर्थिक सर्वेक्षण आज संसद में पेश किया. इस सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में देश की GDP ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है. हालांकि यह मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.4 प्रतिशत की दर से थोड़ा कम है. आर्थिक सर्वे हर साल बजट से पहले पेश किया जाता है और अगले वित्तीय वर्ष की नीतियों के लिए आधार तैयार करता है. इसके साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण में अमेरिका से होने वाली ट्रेड डील के बारे में भी जानकारी दी.
कब होगी भारत-अमेरिका की ट्रेड डील?
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौते की बातचीत इस साल पूरी होने की उम्मीद है. इससे बाहरी मोर्चे पर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है. सर्वे में कहा गया है कि फिलहाल वैश्विक हालात भारत के लिए तुरंत किसी बड़े आर्थिक संकट से ज्यादा बाहरी अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं. प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों में धीमी आर्थिक वृद्धि, टैरिफ (शुल्क) से जुड़ी रुकावटें और पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव कभी-कभी भारत के निर्यात और निवेशकों के भरोसे पर असर डाल सकते हैं.
सर्वे ने कहा, इसी बीच अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता के इस साल पूरी होने की उम्मीद है, जिससे बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता कम हो सकती है. भारत और अमेरिका मार्च पिछले साल से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. अब तक बातचीत के छह दौर हो चुके हैं. हालांकि, अगस्त से अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने के बाद यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई.
अमेरिका ने लगाया है 50% टैरिफ
अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ और इसके ऊपर 25% का अतिरिक्त जुर्माना लगाया था. इसकी वजह भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना बताया गया. दिसंबर 2025 में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का एक प्रतिनिधिमंडल, उप व्यापार प्रतिनिधि एंबेसडर रिक स्विट्जर के नेतृत्व में, व्यापार वार्ता के लिए भारत आया था. टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिकी अधिकारियों की यह दूसरी भारत यात्रा थी.
कैसी रहेगी जीडीपी ग्रोथ?
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 तक भारत की वास्तविक (रियल) जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है. यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि घरेलू मांग मजबूत बनी रहेगी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था स्थिर रहेगी. सर्वे में यह भी कहा गया है कि भारत आने वाले वर्षों में मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ आगे बढ़ रहा है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए, भारत को पूरे साल के लिए 7% से अधिक की रियल ग्रोथ की उम्मीद है. इतना ही नहीं, अगले वित्त वर्ष में भी विकास दर 7% या उसके आसपास रहने की संभावना जताई गई है.
वैश्विक संस्थाओं का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमान कुछ हद तक अलग हैं. गोल्डमैन सैक्स ग्रुप का मानना है कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की संभावनाओं के बावजूद, अगले वित्त वर्ष में भारत की विकास दर घटकर 6.8% रह सकती है. दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का कहना है कि यूरोप और पश्चिम एशिया जैसे बड़े बाजारों से आने वाली मजबूत मांग टैरिफ के असर को काफी हद तक संतुलित कर सकती है. यूएन का यह भी मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाना इस बात का संकेत है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव आ रहा है और भारत इसमें एक अहम भूमिका निभा रहा है.




