आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक शरीर में ‘पित्त दोष’ (Pitta Dosha) का असंतुलन एक ऐसी परेशानी है जिसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

क्या छोटी-छोटी बातों पर आप का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है? अक्सर हम गुस्से को केवल एक स्वभाव या मानसिक स्थिति मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद के नजरिए से यह आपके शरीर के भीतर मचे किसी बड़े बवाल का संकेत हो सकता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक शरीर में ‘पित्त दोष’ (Pitta Dosha) का असंतुलन न केवल आपके व्यवहार को आक्रामक बनाता है, बल्कि यह आपके पाचन और स्किन को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
पित्त का बढ़ना एक ऐसी परेशानी है जिसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। पित्त का बढ़ना एक ऐसी परेशानी है जिसकी वजह से गुस्सा बहुत आता है। गुस्सा इतना ज्यादा आता है कि गुस्से में फड़फड़ाते रहते हैं, आंखें लाल हो जाती हैं और शरीर कांपता रहता हैं। आइए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से समझते हैं कि क्यों बढ़ता है पित्त दोष और कैसे कुछ आसान घरेलू उपायों से आप अपने गुस्से और सेहत दोनों को कंट्रोल कर सकते हैं।
पित्त बढ़ने के कारण
एक्सपर्ट के मुताबिक पित्त बढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे
- ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना
- अनियमित खानपान
- जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन
- शरीर में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों की ज्यादा सेवन
- तनाव और नींद की कमी की वजह से पित्त दोष बढ़ने लगता है।
पित्त बढ़ने से शरीर में होने वाली समस्याएं
आयुर्वेद के मुताबिक पित्त दोष बढ़ने से पेट में जलन,गैस, एसिडिटी, खट्टी डकार, अपच, सीने में जलन, मुंह में कड़वाहट या खट्टापन, ज्यादा पसीना आना और शरीर में गर्मी बढ़ना, चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ना, सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या, स्किन पर रैशेज या जलन होना, अल्सर और पाइल्स की समस्या हो सकती है।
पित्त दोष का इलाज कैसे करें
लौकी का जूस पिएं
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक लौकी के जूस की तासीर ठंडी और अल्कलाइन होती है, जो शरीर में बढ़े हुए पित्त को शांत करने में मदद करती है। पित्त दोष बढ़ने पर शरीर में गर्मी, एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में लौकी का जूस पीकर पाचन को दुरुस्त किया जा सकता है, पित्त दोष को कंट्रोल किया जा सकता है और वजन भी कंट्रोल किया जा सकता है। लौकी की कूलिंग प्रॉपर्टी शरीर के अंदर की अतिरिक्त गर्मी को कम करती है, जिससे पित्त संतुलित होता है।
पेठे का जूस पिएं
अगर आपका पित्त बढ़ा हुआ है, पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही है, बात बात पर गुस्सा आ रहा है तो आप पेठे का जूस पिएं। पेठा की तासीर ठंडी होती है जो पित्त को शांत करती है। जब शरीर में पित्त बढ़ता है तो गर्मी, एसिडिटी, जलन और चिड़चिड़ापन ज्यादा होता है, ऐसे में ये जूस आपको बेहद फायदा पहुंचाएगा। पेठे की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करके पित्त दोष को संतुलित करती है। पेठा अल्कलाइन नेचर का होता है, जो शरीर के pH को संतुलित कर एसिडिटी प्रभाव को कम करता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में सहायक है, जिससे पित्त से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं।
लैमन ग्रास जूस पिएं
लैमन ग्रास जूस का सेवन करने से पित्त दोष संतुलित रहता है। आयुर्वेद के अनुसार लेमन ग्रास हल्की शीतल, सुगंधित और पाचन सुधारने वाली जड़ी-बूटी मानी जाती है। पित्त बढ़ने पर शरीर में गर्मी, एसिडिटी और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, ऐसे में लेमन ग्रास जूस संतुलन बनाने में मदद कर सकता है। लेमन ग्रास में कूलिंग और सुकून देने वाले गुण होते हैं, जो पित्त से जुड़ी गर्मी को कम करने में मदद करते हैं।
एलोवेरा जूस पिएं
आयुर्वेद में एलोवेरा जूस को ठंडी तासीर वाला और पित्त शांत करने वाला माना जाता है। जब शरीर में पित्त बढ़ जाता है तो एसिडिटी, जलन, स्किन प्रॉब्लम और चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं, ऐसे में एलोवेरा जूस काफी फायदेमंद हो सकता है। एलोवेरा की कूलिंग प्रॉपर्टी शरीर की अंदरूनी गर्मी को शांत करती है, जिससे पित्त दोष संतुलित होता है। इसका सेवन करने से सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। गर्भवती महिलाओं या पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को एलोवेरा जूस के सेवन से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिए।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के सुझावों पर आधारित है। यदि आपको गंभीर एसिडिटी, अल्सर या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो किसी भी जूस या नुस्खे को नियमित रूप से शुरू करने से पहले नाड़ी वैद्य या विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह जरूर लें।सत्य रिपोर्ट एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।



