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भारत की मशहूर गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। यह खबर उनके उनके बेटे आनंद भोसले ने दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के कारण आशा भोसले की मृत्यु हो गई। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट और सीने में इन्फेक्शन की शिकायत के बाद कल मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां आज सुबह उनका देहांत हो गया। ऐसे में चलिए जानते हैं कार्डियक अरेस्ट से पहले शरीर में किस तरह के लक्षण दिखते हैं और कब आपको सावधान हो जाना चाहिए?
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण?
कार्डियक अरेस्ट के लक्षणों में अचानक बेहोश हो जाना, नब्ज़ और सांस का बंद हो जाना, सीने में दर्द या तकलीफ, सांस फूलना, कमजोरी और दिल की धड़कन का तेज़ या अनियमित होना (पल्पिटेशन) शामिल हैं, हालांकि कई मामलों में यह बिना किसी चेतावनी के भी हो सकता है।
दिल की इन बीमारियों से हो सकता है कार्डियक अरेस्ट :
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कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़: अगर दिल की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और दूसरी चीज़ें जमा होने से रुकावट आ जाए, जिससे दिल तक खून का बहाव कम हो जाए, तो अचानक कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।
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हार्ट अटैक: अगर हार्ट अटैक आता है जो अक्सर गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ की वजह से होता है तो इससे वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन और कार्डियक अरेस्ट शुरू हो सकता है। इसके अलावा, हार्ट अटैक की वजह से दिल में घाव के निशान (स्कार टिश्यू) रह सकते हैं। ये निशान दिल की धड़कन में बदलाव ला सकते हैं।
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हार्ट वाल्व की बीमारी: दिल के वाल्वों में रिसाव या उनका सिकुड़ना दिल की मांसपेशियों के खिंचने या मोटा होने का कारण बन सकता है। जब कोई वाल्व कसा हुआ या लीक कर रहा हो, तो उससे पड़ने वाले दबाव की वजह से दिल के चैंबर बड़े या कमज़ोर हो जाते हैं; ऐसे में अनियमित धड़कन होने का खतरा बढ़ जाता है।
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जन्म से मौजूद दिल की बीमारी: जन्म से मौजूद दिल की बीमारी को (congenital heart defect) कहते हैं। बच्चों या किशोरों में कार्डियक अरेस्ट अक्सर दिल की किसी ऐसी बीमारी की वजह से होता है जो उन्हें जन्म से ही होती है। जिन वयस्कों ने जन्मजात हृदय दोष के लिए सर्जरी करवाई है, उन्हें भी अचानक कार्डियक अरेस्ट होने का खतरा ज़्यादा होता है।
CPR से बच सकती है जान:
अगर कोई व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है, तो CPR करें। व्यक्ति की छाती पर ज़ोर से और तेज़ी से दबाएं। लगभग 100 से 120 बार प्रति मिनट। इन दबावों को कम्प्रेशन कहते हैं। अगर आपने CPR की ट्रेनिंग ली है, तो व्यक्ति का एयरवे (सांस का रास्ता) चेक करें। फिर हर 30 कम्प्रेशन के बाद रेस्क्यू ब्रेथ (मुंह से सांस देना) दें। अगर आपने ट्रेनिंग नहीं ली है, तो बस छाती पर कम्प्रेशन देना जारी रखें। हर बार दबाने के बीच छाती को पूरी तरह से ऊपर उठने दें। ऐसा तब तक करते रहें जब तक AED उपलब्ध न हो जाए या इमरजेंसी वर्कर न आ जाएं।
क्या हैं बचाव के उपाय:
दिल को स्वस्थ रखने से अचानक कार्डियक अरेस्ट से बचने में मदद मिल सकती है। ये कदम उठाएँ:
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स्वस्थ भोजन करें।
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सक्रिय रहें और नियमित व्यायाम करें।
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धूम्रपान न करें और न ही तंबाकू का सेवन करें।
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नियमित रूप से जाँच करवाएँ।
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दिल की बीमारी के लिए स्क्रीनिंग करवाएँ।
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ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।



