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कोल्हापुरी चप्पल से ग्लोबल ब्रांड तक, इंडियन फुटवियर सेक्टर को मिल सकता है बूस्टर डोज

कोल्हापुरी चप्पल से ग्लोबल ब्रांड तक, इंडियन फुटवियर सेक्टर को मिल सकता है बूस्टर डोज

फुटवियर उद्योग

अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% टैरिफ का असर अब देश के फुटवियर (जूता) उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है. इसी दबाव को कम करने और सेक्टर को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार करीब 1 अरब डॉलर के राहत पैकेज की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पैकेज पर नीति स्तर पर चर्चा अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है.

सरकार का उद्देश्य केवल निर्यातकों को राहत देना नहीं, बल्कि पूरे फुटवियर इकोसिस्टम को मजबूत करना है. प्रस्तावित पैकेज में कच्चे माल, कंपोनेंट्स और फिनिश्ड प्रोडक्ट तक पूरी वैल्यू चेन को कवर किया जाएगा. चूंकि यह सेक्टर श्रम-प्रधान है और इसमें लाखों लोगों को रोजगार मिलता है, इसलिए निवेशकों को प्रोत्साहन देने पर खास जोर रहेगा.

भारत दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर उत्पादक देश

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर उत्पादक देश है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में वैश्विक बाजार में चीन और वियतनाम की पकड़ मजबूत हो गई है. खासकर स्पोर्ट्स शूज़ और एथलीजर सेगमेंट में इन देशों का दबदबा बढ़ा है. भारत में अब भी चमड़े के जूतों और पारंपरिक उत्पादों, जैसे महाराष्ट्र की कोल्हापुरी चप्पलों, की अच्छी पहचान है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि कोल्हापुरी चप्पलों में सालाना 1 अरब डॉलर तक के निर्यात की क्षमता है.

राहत पैकेज की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि घरेलू कंपनियां कई जरूरी इनपुट्स के लिए चीन से आयात पर निर्भर हैं. ऊपर से कच्चे माल पर ज्यादा ड्यूटी लगने के कारण घरेलू उत्पादन महंगा पड़ता है, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होती है. उद्योग जगत का कहना है कि सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में जिस तरह व्यापक पैकेज दिया था, उसी मॉडल को फुटवियर सेक्टर में भी अपनाया जाना चाहिए.

तेजी से बढ़ेगी डिमांड

सरकार घरेलू खपत बढ़ाने पर भी नजर बनाए हुए है. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एक औसत भारतीय की जूता खपत 2 जोड़ी सालाना से बढ़कर 3 जोड़ी तक पहुंच सकती है. GST दरों में बदलाव से भी इस सेक्टर को सहारा मिला है. अब 1000 से 2500 रुपये तक के फुटवियर पर केवल 5% GST लगता है, जिससे मध्यम वर्ग को राहत मिली है और मांग बढ़ने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, प्रस्तावित राहत पैकेज को न केवल मौजूदा संकट से निपटने का उपाय माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत को वैश्विक फुटवियर हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है.

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