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G Ram Ji Bill : कांग्रेस का बड़ा हमला, कहा- गांधी के विचारों, गरीबों को खत्म करने की ‘सोची-समझी साज़िश’ है ‘वीबी-जी राम जी’ कानून

G Ram Ji Bill : भोपाल। कांग्रेस ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर मनरेगा के स्थान पर लाए गए ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी विधेयक, 2025’ को महात्मा गांधी के विचारों पर सीधा हमला करार दिया और कहा कि यह गरीबों से काम का संवैधानिक अधिकार छीनने की ‘सोची-समझी साजिश’ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व प्रभारी बी के हरिप्रसाद ने यहां प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर यह गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘सुधार’ के नाम पर दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी योजना मनरेगा को खत्म करने का काम किया है। उन्होंने कहा, ‘यह महात्मा गांधी के विचारों पर सीधा हमला है और देश के सबसे गरीब नागरिकों से काम का संवैधानिक अधिकार छीनने की सोची-समझी साजिश है।’

गरीबों के साथ धोखा : कांग्रेस

कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हरिप्रसाद ने कहा कि दशक पुराना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) गांधी जी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेन्द्रीकृत विकास की अवधारणा का जीवंत उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन मोदी सरकार ने न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया, बल्कि 12 करोड़ से अधिक मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को बेरहमी से कुचल दिया। पिछले दो दशकों से यह योजना करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा रही है और कोविड-19 महामारी के दौरान यह सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कवच साबित हुई।’ उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से ही प्रधानमंत्री मोदी मनरेगा के खिलाफ रहे हैं और इसे उन्होंने ‘‘कांग्रेस की असफलताओं का स्मारक’’ तक करार दिया था।उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मनरेगा को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया, बजट में भारी कटौती की, राज्यों का वैधानिक फंड रोका, जॉब कार्ड रद्द किया और आधार आधारित भुगतान को अनिवार्य कर लगभग 7 करोड़ मज़दूरों को योजना से बाहर कर दिया। उन्होंने दावा किया इसके परिणामस्वरूप पिछले पांच वर्षों में मनरेगा में औसतन केवल 50–55 दिन का काम ही मिल पाया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार आधारित गारंटी थी, जिसे अब एक सशर्त, केंद्र-नियंत्रित योजना में बदला जा रहा है।उन्होंने कहा, ‘यह सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों से संवैधानिक वादा छीनने की प्रक्रिया है।’ हरिप्रसाद ने कहा कि मनरेगा पूरी तरह केंद्र द्वारा वित्तपोषित थी, लेकिन अब मोदी सरकार राज्यों पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये का बोझ डालना चाहती है, जबकि नियम, ब्रांडिंग और श्रेय केंद्र अपने पास रखेगा, जो कि सहकारी संघवाद के साथ धोखा है। उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था के तहत सरकार तय समय पर रोज़गार बंद कर सकती है और फसल के मौसम में मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह कल्याण नहीं, बल्कि राज्य-नियंत्रित श्रम शोषण है।’ उन्होंने कहा कि मनरेगा की मांग आधारित प्रकृति खत्म कर इसे सीमित बजट वाली केंद्र-निर्धारित योजना बनाया जा रहा है, जिससे रोज़गार का कानूनी अधिकार समाप्त हो रहा है।

महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान और ग्रामीण भारत पर खुला हमला : कांग्रेस

हरिप्रसाद ने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान और ग्रामीण भारत पर खुला हमला है। उन्होंने कहा, ‘रिकॉर्ड बेरोज़गारी के बाद अब गरीब ग्रामीण परिवारों की आखिरी आर्थिक सुरक्षा को भी निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी इस जन-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और संघीय ढांचे पर हमले का विरोध सड़क से लेकर संसद तक करेगी।’ उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस और इसके वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बदनाम करने के लिए भाजपा ने इसे ‘गढ़ा’ था। उन्होंने कहा, ‘न्यायालय द्वारा ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) का मामला खारिज किया जाना मोदी-शाह की बदले की राजनीति पर करारा तमाचा है।’

हरिप्रसाद ने कहा कि न्यायालय ने साफ कहा कि इस मामले में कोई मूल अपराध ही नहीं था, फिर भी राजनीतिक दबाव में जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया।उन्होंने कहा, ‘सच की जीत हुई है और सच की हमेशा जीत होगी। कोई भी एजेंसी, कोई भी धमकी लोकतंत्र और संविधान की आवाज़ को दबा नहीं सकती। कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं को भाजपा के दुरुपयोग से बचाने की लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेगी।’ ज्ञात हो पिछले दिनों संसद ने ‘वीबी-जी राम जी विधेयक, 2025’ को पारित कर दिया था और फिर रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसे अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही यह विधेयक कानून का रूप ले चुका है। सरकार ने कहा है कि नया कानून केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन से जुड़ा हुआ है और इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में रोजगार को अधिक उत्पादक, टिकाऊ तथा अवसंरचना निर्माण से जोड़ना है। नया कानून ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी देता है, जबकि मनरेगा में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी।

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