उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते कुछ समय से लड़कियों के गायब होने और उनके अगवा होने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को फटकार लगाई है. साथ ही पुलिस कमिश्नर से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.
उत्तर प्रदेश में गायब हो रहीं बच्चियां
बीते कुछ समय से उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लड़कियों के गायब होने की खबरें सामने आ रही हैं. इस तरह के बढ़ते मामलों को लेकर लोगों में डर का माहौल देखने को मिल रहा है. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी पुलिस को फटकार लगाई है. साथ ही पुलिस कमिश्नर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इसके अलावा तीन दिनों के अंदर मामलों की समीक्षा कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों को विवेचकों के साथ अगली सुनवाई में हाजिर होने का आदेश दिया गया है.
12 साल की बच्ची के पिता ने दायर की याचिका
इलाहाबाद की लखनऊ बेंच ने 12 साल की बच्ची के पिता द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया है. याचिका में बताया गया है कि 12 साल की बच्ची बीते चार महीनों से लापता है. पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम उठाते हुए प्रगति हासिल नहीं की है. पुलिस में शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई, तो उसके पिता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
हाईकोर्ट ने जताई चिंता
लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के लगातार बढ़ते गुमशुदगी के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं दिखाई दे रही है और कई मामलों में जांच काफी धीमी गति से चल रही है.
डीसीपी को दिए गए आदेश
जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान डीसीपी पूर्वी को निर्देश दिया कि वे उन सभी थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों के साथ अदालत में उपस्थित हों, जिनके पास नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी से जुड़े मामले लंबित हैं. कोर्ट ने सवाल किया कि जब कोई बच्ची लंबे समय से लापता है, तो उसे तलाशने के लिए पुलिस ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और जांच में प्रगति क्यों नहीं हुई?
‘अगली सुनवाई में पेश हों’
हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि नाबालिग बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं करती है, तो न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ेगा. मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी, जिसमें पुलिस को अपनी कार्रवाई और जांच की प्रगति की विस्तृत जानकारी अदालत के सामने पेश करनी होगी.


