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सिरदर्द की दवा खा-खाकर हो गए हैं परेशान? पेट की इन 2 समस्याओं को ठीक करते ही मिलेगा आराम

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Headache Home Remedies: अक्सर सिरदर्द होते ही हम पेनकिलर की ओर भागते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि समस्या सिर में नहीं बल्कि आपके पेट में हो सकती है। आयुर्वेद के अनुसार वात और पित्त का असंतुलन पेट से होते हुए सिर तक पहुंचता है जिससे गंभीर दर्द पैदा होता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिरदर्द एक आम समस्या बन गया है। अधिकांश लोग इसे तनाव या काम का बोझ मानकर बाम या पेनकिलर का सहारा लेते हैं। लेकिन आयुर्वेद की प्रसिद्ध सुश्रुत संहिता के अनुसार हमारे शरीर के दोष (वात, पित्त और कफ) जब पाचन तंत्र में बिगड़ते हैं तो वे ऊपर की ओर संचार करते हैं और सिरदर्द का कारण बनते हैं।

पित्त और एसिडिटी

माइग्रेन का भ्रम अगर आप बहुत अधिक तीखा, तला-भुना या खट्टा भोजन करते हैं तो शरीर में पित्त की मात्रा बढ़ जाती है। यह बढ़ा हुआ पित्त रक्त के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचता है। इससे आंखों के पीछे तेज दर्द, जलन और भारीपन महसूस होता है। कई लोग इसे माइग्रेन समझकर भारी दवाएं लेने लगते हैं जबकि इसका असली इलाज पेट की गर्मी को शांत करना है।

कब्ज और गैस

टॉक्सिन्स का हमला जब पेट साफ नहीं होता (कब्ज) या गैस बनती है तो शरीर में टॉक्सिन्स यानी ‘आम’ जमा होने लगते हैं। ये दूषित तत्व रक्त के माध्यम से नसों पर दबाव डालते हैं जिससे सिर में भारीपन और चिड़चिड़ापन महसूस होता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ सिर पर बाम लगाना एक अस्थायी समाधान है स्थायी नहीं।

आयुर्वेद के 5 जादुई समाधान

  • नस्य क्रिया: रात को सोते समय नाक में शुद्ध देसी घी की दो बूंदें डालें। यह नसों को पोषण देता है और पित्त जनित सिरदर्द को जड़ से खत्म करता है।
  • धनिया और मिश्री का पानी: अगर दर्द एसिडिटी के कारण है तो रात भर भीगे हुए धनिया के पानी में थोड़ी मिश्री मिलाकर पिएं। यह प्राकृतिक कूलेंट की तरह काम करता है।
  • सोंठ का लेप: गैस के कारण होने वाले दर्द में सूखे अदरक (सोंठ) का लेप माथे पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है।
  • अविपत्तिकर चूर्ण: रात में गुनगुने पानी के साथ यह चूर्ण लेने से कब्ज और एसिडिटी दोनों कंट्रोल होते हैं।
  • लाइफस्टाइल में बदलाव: देर रात भारी खाना खाने से बचें और बासी भोजन का त्याग करें।

आधुनिक विज्ञान भी अब गट-ब्रेन एक्सिस के सिद्धांत को मानता है जिसका अर्थ है कि पेट का सीधा संबंध आपके दिमाग से है। अगली बार सिर फटने लगे तो दवा की जगह अपने पाचन पर ध्यान दें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

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