डूंगरपुर: जिले में होमगार्ड तैनाती एवं ड्यूटी प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है. कोतवाली थाने में शिकायतकर्ता कुलदीप सिंह झाला द्वारा प्रस्तुत परिवाद में दो स्वयंसेवकों दीपक कुमार शर्मा तथा सादेकिन जमाल पठान पर कई वर्षों से बिना वास्तविक ड्यूटी किए सरकारी भुगतान प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है. मामला अब विभागीय और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चाओं में है.
17 माह पुरानी शिकायत, विभाग और थाने दोनों को कराया था अवगत
परिवादी कुलदीप सिंह झाला के अनुसार उन्होंने लगभग 17 माह पूर्व ही कोतवाली पुलिस, होमगार्ड विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिला पुलिस प्रशासन को यह बताते हुए शिकायत दी थी कि संबंधित दोनों स्वयंसेवक कागजों में रात्रिगश्त ड्यूटी दर्शाते हैं, परंतु वास्तव में किसी भी प्रकार की 8 घंटे की अनिवार्य ड्यूटी नहीं करते और कई वर्षों से “घर पर बैठकर सरकारी राजकोष का लाभ लेने” की प्रथा चल रही है.
कागजों बनाम वास्तविकता, ड्यूटी आदेशों में नाम पर उपस्थिति शून्य
होमगार्ड विभाग द्वारा रात्रिगश्त हेतु जो दैनिक ड्यूटी आदेश जारी किए जाते हैं, उनमें उपरोक्त दोनों स्वयंसेवकों के नाम भी शामिल रहते हैं. जबकि अन्य स्वयंसेवक निर्धारित समय पर थाना कोतवाली में आमद–रवानगी दर्ज कराते हैं. डीओ, जनरल डीओ और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा निरीक्षण में चेक किए जाते हैं तथा अपनी 8 घंटे की विधिसम्मत ड्यूटी पूरी करते हैं.
परिवाद में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि दीपक शर्मा और सादेकिन जमाल पठान न तो दैनिक उपस्थिति देते है, न रवानगी, न ही रात्रिगश्त में कभी नियमानुसार पाए गए. इसके बावजूद वे वर्षों से “नियमित कार्य” दिखाकर भुगतान प्राप्त कर रहे हैं.
आरटीआई में जवाब टालमटोल, “व्यक्तिगत जानकारी” कहकर सूचना देने से इंकार
कुलदीप सिंह झाला ने जानकारी हेतु जिला पुलिस अधीक्षक डूंगरपुर से आरटीआई के माध्यम से विस्तृत रिकॉर्ड मांगा जिसमें ड्यूटी उपस्थिति, निरीक्षण विवरण, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और वास्तविक ड्यूटी शिनाख्त रिपोर्ट मांगी गई थी. परंतु, परिवादी के अनुसार विभाग ने पूर्व की भांति इस बार भी वही जवाब दिया कि “उक्त जानकारी व्यक्तिगत होने से प्रदान नहीं की जा सकती.”
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब दो स्वयंसेवक जनता के कर पैसों से वर्षों से भुगतान प्राप्त कर रहे हैं तो ड्यूटी कर रहे हैं या नहीं ? यह व्यक्तिगत सूचना नहीं बल्कि विभागीय दायित्व के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक प्रकृति की जानकारी है.
पुलिस एवं होमगार्ड नियमों के अनुसार कानून क्या कहता है
राजस्थान पुलिस अधिनियम व विभागीय स्थाई आदेशों के अनुसार प्रत्येक ड्यूटी कार्मिक को आमद–रवानगी अनिवार्य रूप से दर्ज करानी होती है. रात्रिगश्त में उपस्थित अधिकारी/डीओ द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाना चाहिए. 8 घंटे की पूर्ण ड्यूटी अवधि, रिकॉर्ड में दर्ज उपस्थिति और निरीक्षण रिपोर्ट अनिवार्य शर्त मानी जाती है. बिना ड्यूटी भुगतान लेना, भुगतान करवाना या कागजों में ड्यूटी दर्शाना विभागीय दंड, निलंबन तथा आईपीसी की धारा 409/420/468 (बीएनएस की धारा 311/318/291) तक का विषय बन सकता है.
राजस्थान होमगार्ड अधिनियम एवं नियमावली के अनुसार स्वैच्छिक बल होने के बावजूद ड्यूटी में अनुपस्थिति, ड्यूटी समय का दुरुपयोग, विभागीय आदेशों की अवहेलना, कागजों में ड्यूटी दर्शाकर भुगतान प्राप्त करना सीधे तौर पर गंभीर कदाचार माना जाता है.
प्रथम अपील विचाराधीन, मामला अब उच्च स्तर पर
आरटीआई में अधूरी/गलत जानकारी देने पर परिवादी द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक, डूंगरपुर के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की गई है, जो वर्तमान में विचाराधीन है. परिवादी ने अपील में यह भी कहा है कि जानकारी छिपाने से साफ है कि विभाग के अंदरूनी रिकॉर्ड में कई विसंगतियां हैं और वास्तविक ड्यूटी की जांच होने पर बड़ा घोटाला सामने आ सकता है.
मामले की विस्तृत जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई आवश्यक
यह केवल दो स्वयंसेवकों का मामला नहीं, बल्कि ड्यूटी निरीक्षण व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया एवं प्रशासनिक निगरानी तंत्र की विफलता का संकेत है. परिवादी ने मांग करी है कि सभी वर्षों का ड्यूटी–भुगतान मिलान ऑडिट कराया जाए, रात्रिगश्त निरीक्षण रिपोर्टों की सत्यता की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर कठोर विभागीय/कानूनी कार्रवाई की जाए.

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