पारस हॉस्पिटल गुरुग्राम में कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर वाधवानी के मुताबिक हाई बीपी को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि ये सीधे तौर पर हार्ट की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।

हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती दौर में साफ तौर पर दिखाई नहीं देते। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनियंत्रित ब्लड प्रेशर आपके दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है और हार्ट अटैक का कारण बन जाता है? मेडिकल साइंस में हाई बीपी और हृदय रोगों के बीच गहरा संबंध पाया गया है। हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) के मुताबिक बढ़ा हुआ बीपी दिल की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है।
पारस हॉस्पिटल गुरुग्राम में कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर महेश वाधवानी के मुताबिक हाई बीपी को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि ये सीधे तौर पर हार्ट की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। हाई ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ती समस्या बन चुका है जिसे अक्सर लोग हल्के में लेते हैं, लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक ये दिल पर अतिरिक्त दबाव डालकर हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का बड़ा कारण बन सकता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं हाई बीपी और दिल के बीच कैसा है कनेक्शन।
हाई बीपी कैसे डालता है दिल पर असर?
हाई ब्लड प्रेशर का मतलब है कि आपकी रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) में दबाव सामान्य से ज्यादा है। यह स्थिति दिल पर अतिरिक्त बोझ डालती है, क्योंकि उसे ज्यादा दबाव के साथ खून पंप करना पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर दिल की मांसपेशियां थकने लगती हैं और धीरे-धीरे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। अगर किसी व्यक्ति का दिल सामान्य स्थिति में 80–100 साल तक हेल्दी रह सकता है, तो लगातार हाई बीपी की वजह से वो कम उम्र में ही बीमार बन सकता है।
हार्ट अटैक से बीपी का क्या है कनेक्शन?
हाई बीपी न केवल दिल पर दबाव बढ़ाता है, बल्कि यह रक्त वाहिकाओं को सख्त भी बना देता है। इससे नसों में ब्लॉकेज बनने का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। कई मामलों में मरीज को पहले से कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन अचानक जांच में पता चलता है कि उन्हें पहले साइलेंट हार्ट अटैक हो चुका है या नसों में ब्लॉकेज है।
क्या है सामान्य ब्लड प्रेशर?
आमतौर पर 140/90 mmHg से ऊपर का ब्लड प्रेशर हाई माना जाता है। हालांकि उम्र के अनुसार इसकी सीमा थोड़ी अलग हो सकती है। 18 से 20 साल की उम्र में 130 के आसपास बीपी को भी हाई माना जा सकता है। 60 साल से ज्यादा की उम्र में कुछ मामलों में 140 तक बीपी को नॉर्मल माना जा सकता है।
हाई बीपी कैसे हार्ट अटैक का कारण बनता है?
एक्सपर्ट ने बताया अगर ब्लड प्रेशर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए जैसे 200 से ऊपर चला जाए तो दिल तुरंत एडजस्ट नहीं कर पाता और हार्ट फेलियर हो सकता है। वहीं, अगर बीपी लंबे समय तक 150–160 के आसपास बना रहे, तो धीरे-धीरे बिना लक्षण के दिल कमजोर होता जाता है। ये स्थिति और भी खतरनाक होती है क्योंकि मरीज को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता।
हाई बीपी कैसे बॉडी के अंगों को करता है प्रभावित
हाई बीपी सिर्फ दिल की बीमारी नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लगातार लम्बे समय तक बीपी हाई रहने से स्ट्रोक और पैरालिसिस का खतरा बढ़ सकता है। लगातार हाई बीपी रहने की वजह से आंखें कमजोर हो सकती है। हाई बीपी का असर किडनी और फेफड़ों की सेहत भी बिगाड़ सकता है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल कैसे करें
- हाई बीपी को कंट्रोल करना चाहते हैं तो नमक का सेवन कम करें। WHO के अनुसार रोजाना 3–5 ग्राम नमक का सेवन पर्याप्त है। भारतीय डाइट में अचार, पापड़, नमकीन और प्रोसेस्ड फूड ज्यादा होते हैं जिसमें नमक का सेवन ज्यादा किया जाता है।
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक करें, ताकि हाई बीपी का पता चल सके। सामान्य व्यक्ति साल में कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक कराएं।
दवाइयां समय पर लें और बीच में बंद न करें। समय पर जांच, सही खानपान और दवाओं के नियमित सेवन से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
नियमित व्यायाम भी हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को टालता है और बीपी को नॉर्मल रखता है। दिन में कम से कम 30 मिनट की पैदल सैर करें।
तनाव कंट्रोल करें। योग और ध्यान करें
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। यदि आपको Hypertension से जुड़ी कोई समस्या है, तो सही सलाह और इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।सत्य रिपोर्ट एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।



