
आप बाइक चलाते हैं ना तो एक आदत जरूर डाल लीजिए। बाइक रुकते ही एड़ियां जमीन पर टिकाकर बैठने की आदत, इससे बॉडी नैचुरली रीसेट हो जाती है। और ये कोई नई एक्सरसाइज नहीं है। गांवों में सुबह चाय पीनी हो, खाना हो या खेत में काम करना हो लोग ऐसे यानि ऊंकडू़ ही बैठते हैं और ये बॉडी का अपना mechanism है उसे बैलेंस रखने का। ऊंकडू़ पोज’ में इंसान सदियों से बैठता आया है। लेकिन सवाल ये है जो पॉश्चर शरीर के लिए सबसे नेचुरल था वो हमारी लाइफ से गायब कैसे हो गया ? जवाब सीधा सा है हम चल तो रहे हैं लेकिन ”बैठना भूल गए हैं”। कुर्सी, सोफा, कार सीट और घंटों का सफर, नतीजा झुकी पीठ, गर्दन आगे, कमर और घुटने की दिक्कत। और ये समस्या छोटी नहीं है देश में करीब ’26 करोड़ लोग टू व्हिलर’ चलाते हैं और करीब ‘5 करोड़ लोग फोर व्हिलर’ लंबी राइड, लंबी ड्राइव, पॉश्चर बिगाड़ती है। कमर दर्द, गर्दन में अकड़न, कंधों में तनाव, और धीरे-धीरे रीढ़ पर दबाव बढ़ता है।
जबकि समाधान हमारे पैरों के नीचे और हमारी परंपरा में छुपा है। इस तरह ज़मीन पर बैठना पूरे शरीर का ‘नेचुरल अलाइनमेंट’ है। इससे टांगें, कूल्हे, कोर मसल्स मजबूत होते हैं। पेट के आसपास फैट बर्न होता है। पॉश्चर सुधरता है, बैलेंस बढ़ता है। इतना ही नहीं ऊंकड़ू कह लें या फिर ‘स्क्वॉट पोजीशन’ या फिर मलासन। ये पाचन के लिए बेहतर होता है। गैस-एसिडिटी से राहत मिलती है, ब्लड सर्कुलेशन बैलेंस रहता है, डायबिटीज और हाई बीपी का खतरा कम होता है। घुटने-टखने-कूल्हे मजबूत होते हैं। जिससे पीठ दर्द में आराम मिलता है। यही नहीं पुरुषों में प्रोस्टेट हेल्थ, तो महिलाओं में पेल्विक फ्लोर स्ट्रॉन्ग होता है।
दरअसल मेटाबॉलिज्म बूस्ट होने से तनाव कम और फोकस बेहतर होता है। कहने का मतलब ये कि एक पोज से पूरी बॉडी का ट्यून-अप हो जाता है। तो सवाल सिर्फ ऊंकडू़ बैठने का नहीं है सवाल है स्पाइन, पीठ, कमर, गर्दन, घुटनों और पूरी बॉडी पॉश्चर को सही करने का। इसके अलावा योग में क्या अभ्यास है कमर और गर्दन की मजबूती के पॉश्चर सुधारने के लिए। स्वामी रामदेव से जानेंगे बॉडी पॉश्चर सुधारने के लिए क्या करना चाहिए।
हाई स्पीड से खतरे में रीढ़
हड्डियां टूटने का खतरा।
कम रफ्तार में टक्कर।
फैट और मसल्स झटके रोकते हैं।
रीढ़ की हड्डी पर असर नहीं।
स्पाइनल प्रॉब्लम की वजह
गलत पॉश्चर में बैठना।
लैपटॉप पर देर तक काम।
स्मार्ट फोन का ज़्यादा इस्तेमाल।
मोटापा वर्कआउट ना करना।
दुनिया में पीठदर्द के मामले
साल 2020 में पीठ दर्द से परेशान मरीजों की संख्या 63 करोड़ करोड़ थी जो साल 2050 तक बढ़कर 84 करोड़ हो सकती है। वहीं भारत में 45% लोग नहीं देते हैं बैकपेन पर ध्यान।
स्लिप डिस्क के स्टेज
फर्स्ट स्टेज
डिस्क का डिहाइड्रेट होना।
डिस्क की फ्लेक्सिबिलिटी कम होना।
डिस्क में कमजोरी आना।
सेकंड स्टेज
डिस्क की रेशेदार परत टूटना।
थर्ड स्टेज
न्यूक्लियस का एक हिस्सा टूटना।
फोर्थ स्टेज
स्पाइन में लिक्विड लीक होना।
कंधे का दर्द कैसे दूर करें?
हल्दी दूध शहद पीएं।
नारियल तेल लगाएं।
हल्दी पेस्ट की चाय पीएं।
शहद-अदरक
सेंधा नमक से धोएं
गर्म पानी।
सर्वाइकल पेन से कैसे पाएं छुटकारा
बैठते समय गर्दन को सीधा रखें।
नर्म गद्दे की जगह तख्त पर सोएं।
विटामिन डी, कैल्शियम से भरपूर चीजें खाएं।
हड्डियां होंगी मजबूत
हल्दी दूध
सेब का सिरका
अदरक चाय
दालचीनी-शहद
गुनगुना पानी
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Satya Report किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)




