राजस्थान के बाड़मेर में जिला कलेक्टर टीना डाबी और मंत्री केके बिश्नोई द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह में एक युवक को सम्मानित करने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि, बयाना से निर्दलीय विधायक ऋतू बनावत ने युवक को सम्मानित किए जाने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि जिस युवक को जिला कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया है, वो युवक उनका डीपफेक वीडियो वायरल करने में संलिप्त था, जिसके बाद बाड़मेर जिला कलेक्टर टीना डाबी ने युवक को दिया गया सम्मान वापस लेने और इस चूक के लिए जिम्मेदार कर्मिकों के विरुद्ध विभागीय जांच करने के आदेश दिए हैं.
गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया था, जिसमें पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए उत्कृष्ट बाड़मेर जिले के सेड़वा इलाके के बांधनिया निवासी दिनेश मांजू का आवेदन प्राप्त हुआ था. समिति की सिफारिश के बाद जिला प्रशासन द्वारा मांजू का नाम सम्मानित करने वाली सूची में शामिल किया गया था. वहीं दिनेश मांजू को गणतंत्र दिवस पर जिला कलेक्टर टीना डाबी और समारोह के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री केके बिश्नोई द्वारा सम्मानित किया गया था.
विधायक ने किया था विरोध
इस सम्मान को लेकर बयाना विधानसभा से निर्दलीय विधायक ऋतू बनावत ने कड़ा विरोध जताते हुए मामला विधानसभा में उठाया. जिसके बाद जिला कलेक्टर टीना डाबी ने आदेश जारी कर जिला स्तरीय सम्मान को प्रत्याहरित करते हुए सम्मानित करने से पूर्व संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों की रिपोर्ट पेश नहीं करने और जांच नहीं करने जैसे चूक के लिए संबंधित कार्मिकों के खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
क्या है मामला?
दरअसल, जनवरी 2024 में सोशल मीडिया अकाउंट्स पर विधायक ऋतू बनावत का बताकर एक वीडियो वायरल किया गया था, जिसको लेकर विधायक ने वीडियो को डीप फेक बताते हुए उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया था. पुलिस ने इस मामले में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था. वहीं इसमें दिनेश कुमार नाम का एक युवक भी वीडियो वायरल करने के मामले में आरोपी था. हालांकि पुलिस द्वारा इसकी तलाश की जा रही थी. विधायक ऋतू बनावत का दावा है कि बाड़मेर जिला कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया, दिनेश मांजू वहीं युवक हैं. विधायक के खुलासे के बाद जिला प्रशासन द्वारा सम्मान वापस लेने के आदेश जारी कर दिए हैं. वहीं इस मामले ने कहीं ना कहीं इस मामले में जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.




