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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत का ‘प्लान-B’ तैयार! गैस सप्लाई न रुके इसलिए खर्च होंगे ₹600 करोड़; क्या महंगी होगी रसोई गैस?

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत का ‘प्लान-B’ तैयार! गैस सप्लाई न रुके इसलिए खर्च होंगे ₹600 करोड़; क्या महंगी होगी रसोई गैस?

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है, लेकिन भारत सरकार ने समय रहते बड़ा कदम उठा लिया है. सरकार एलएनजी के लिए करीब 600 करोड़ रुपये का एक वॉर चेस्ट तैयार कर रही है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत गैस खरीदी जा सके. इसका सीधा मकसद यह है कि देश में फर्टिलाइजर बनाने वाले प्लांट्स को गैस की कमी का सामना न करना पड़े और उत्पादन लगातार चलता रहे.

दरअसल, उर्वरक उत्पादन के लिए गैस बेहद जरूरी होती है. अगर गैस की सप्लाई कम होती है, तो इसका असर सीधे खेती और किसानों पर पड़ सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फंड तैयार करने का फैसला लिया है, ताकि अचानक आई किसी भी कमी को तुरंत पूरा किया जा सके.

क्यों बढ़ी चिंता?

ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्ते पर अनिश्चितता बढ़ गई है. यह रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह तनाव लंबे समय तक चलता है, तो गैस की उपलब्धता 70% से घटकर 50-60% तक आ सकती है. ऐसे में कीमतें भी तेजी से बढ़ सकती हैं और इसका असर सीधे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ेगा.

LNG की कीमतों में तेज उछाल संभव

एनर्जी सेक्टर के जानकारों के मुताबिक, एशिया में LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की कीमतों में 40% तक बढ़ोतरी हो सकती है. इसका मतलब है कि गैस खरीदना महंगा हो जाएगा और उत्पादन लागत भी बढ़ेगी. हालांकि, सरकार का यह वॉर चेस्ट इसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है. इससे स्पॉट मार्केट से तुरंत गैस खरीदकर सप्लाई को स्थिर रखा जा सकेगा.

उर्वरक प्लांट्स को मिलेगा बड़ा सहारा

इस समय भारत के यूरिया प्लांट्स अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा लंबे समय के अनुबंधों से पूरा करते हैं, जबकि कुछ हिस्सा स्पॉट मार्केट से खरीदा जाता है. अगर सप्लाई में कमी आती है, तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है. सरकार अब स्पॉट मार्केट से ज्यादा गैस खरीदने की तैयारी में है, ताकि प्लांट्स को बंद न करना पड़े और उत्पादन लगातार चलता रहे. इससे किसानों को भी समय पर खाद मिलती रहेगी.

खरीफ सीजन से पहले बड़ी तैयारी

भारत में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरक की मांग काफी बढ़ जाती है. इस समय देश को हर साल करोड़ों टन यूरिया की जरूरत होती है. ऐसे में अगर गैस की सप्लाई प्रभावित होती है, तो उत्पादन कम हो सकता है और आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है. सरकार इस स्थिति से बचना चाहती है, इसलिए पहले से ही तैयारी कर रही है. देश में करीब 37 यूरिया प्लांट्स गैस पर निर्भर हैं और उनकी लागत का बड़ा हिस्सा इसी पर टिका होता है.

क्या होगा इसका असर?

सरकार के इस कदम से आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. गैस की कमी से उर्वरक उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा, जिससे खेती पर कोई संकट नहीं आएगा. साथ ही, अचानक कीमतों में उछाल का असर भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा.

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