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क्या BJP में शामिल होने वाले हैं राघव चड्ढा? आतिशी की ‘रहस्यमयी मुस्कान’ ने बढ़ा दी सियासी हलचल!

क्या BJP में शामिल होने वाले हैं राघव चड्ढा? आतिशी की ‘रहस्यमयी मुस्कान’ ने बढ़ा दी सियासी हलचल!

कभी आम आदमी पार्टी नेताओं के आंखों के तारे रहे राघव चड्ढा आज बेगाने हो चुके हैं. नौबत यहां तक पहुंच गई कि राघव वीडियो मैसेज जारी कर पार्टी आलाकमान को सीधे सैलाब लाने की चुनौती दे बैठे. अब आप आदमी पार्टी ने भी राघव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पलटवार कर राघव को प्रधानमंत्री मोदी से डरने वाला और उनकी गोद में बैठा हुआ बता दिया. उनसे सवाल किया गया- क्या राघव चड्ढा BJP ज्वाइन करेंगे, अगर वो पार्टी छोड़ने का फैसला करते हैं तो उन्हें रोकेंगे या नहीं? इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि ये उनकी मर्जी.

आतिशी ने राघव चढ़ा के बयान पर पलटवार करते कहा, मैं राघव जी से पूछना चाहूंगी बीजेपी से इतना डरते क्यों हैं, मोदी जी से इतना डरते क्यों है? आज बीजेपी और मोदी जी लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं. आज जिस तरीके से पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का इस्तेमाल करते हुए वोटों को काटकर और एडमिनिस्ट्रेशन पर कब्जा कर बंगाल का चुनाव चुराया जा रहा है, यही दिल्ली में हुआ था. बीजेपी चुनाव चुराकर ले गई लेकिन जब टीएमसी इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ इंपिचमेंट मोशन लेकर आती है तो राघव चड्ढा उस पर साइन करने से इनकार कर देते हैं, क्यों? उनको मोदी जी से डर लगता है?

राघव चड्ढा क्यों डरेंगे, उन्हें किस बात का डर?

इस सवाल पर आतिशी ने कहा, ये वो बताएंगे कि क्यों डर रहे हैं, क्यों उनके मुंह में दही जमी हुई है? जब पूरा विपक्ष लोकतंत्र पर हो रहे हमले के मुद्दे पर संसद से वॉकआउट करता है तो राघव चड्ढा नहीं करते हैं. आखिर क्यों, क्या बीजेपी से डर लग रहा है? जब पार्टी उनको कहती है, आज आप पार्टी का सबसे बड़ा मुद्दा, देश में LPG सिलेंडर ब्लैक में 5-10 गुना दाम में सिलेंडर बिक रहा है, इस पर नहीं बोलते. इन सबसे दिख रहा है ना कि वह मोदी जी से डर गए हैं, मोदी जी की बात आते ही उनका नाम आते ही, राघव चढ़ा के मुंह में दही जम जाती है.

राघव चड्ढा का कहना है कि जिन मुद्दों को उठा रहे थे, वो जन सरोकार के हैं तो क्या उन मुद्दों को उठाने से पहले वह आम आदमी पार्टी के नेताओं से चर्चा नहीं करते थे? इस सवाल पर आतिशी ने कहा, हम आम आदमी पार्टी के सिपाही हैं, अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं. हम बीजेपी के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, मोदी जी के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे. हमारे सारे नेताओं को जेल भेजा गया, फिर भी हम डरे नहीं लेकिन राघव चड्ढा ने दिखा दिया है कि लोकतंत्र की इस लड़ाई में वह लोकतंत्र और संविधान के साथ नहीं बल्कि बीजेपी के साथ हैं.

लंबे समय से पार्टी से दूर थे, फिर अभी एक्शन क्यों?

राघव चड्ढा लंबे समय से पार्टी से दूर दिख रहे थे, केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय विदेश में थे, बरी होने पर भी सामने नहीं आए, तो एक्शन अभी होना क्यों तय किया गया? इस पर आतिशी ने कहा, जब आपका कोई साथी होता है तो आप शुरुआत से उस पर अविश्वास नहीं करते. अंग्रेजी में एक फेज होता है बेनिफिट ऑफ डाउट यानी कि संदेह का लाभ. अगर कोई शंका है तो संदेश का लाभ दिया जाता है. हो सकता है वास्तव में उनकी आंखें खराब हो, हो सकता है वास्तव में उनको ऑपरेशन के लिए लंदन जाना पड़ा, हो सकता है वास्तव में वह साइन करने के लिए उपलब्ध नहीं थे. जब हमें कई बार देखने को मिला कि वह बीजेपी के खिलाफ नहीं बोल रहे हैं तो शुरुआत में उनको बेनिफिट ऑफ डाउट दिया गया लेकिन आज यह बिल्कुल साफ है कि वह मोदी जी की गोद में जाकर बैठ गए हैं. आज राघव चड्ढा जी के फेवर में कौन बोल रहा है. बीजेपी के सांसद बोल रहे हैं.

क्या राघव चड्ढा भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करेंगे?

आतिशी ने कहा कि वह तो राघव जी बताएंगे लेकिन बीजेपी के नेताओं उनको न्योता जरूर दे रहे हैं. जिस तरीके से पोस्ट कर राघव चड्ढा ने पार्टी के आलाकमान को ही चुनौती दी है तो क्या पार्टी में बने रहेंगे? इस सवाल पर आतिशी ने कहा कि यह सवाल आम आदमी पार्टी का नहीं है. यह सवाल इस देश का है. अगर आज लोकतंत्र की लड़ाई में कोई बीजेपी के खिलाफ नहीं है तो यह साफ है वह संविधान के साथ नहीं है. राघव चड्ढा पार्टी छोड़कर जाते हैं तो रोकेंगे या नहीं? इस पर पूर्व सीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह उनकी मर्जी है.

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