जबलपुर: इंस्टाग्राम से रचा हनी ट्रैप, झूठे दुष्कर्म केस में फंसाने की धमकी, तीन आरोपी गिरफ्तार

जबलपुर: इंस्टाग्राम चैटिंग के जरिए युवाओं को फंसाने और उनसे वसूली करने वाले एक संगठित हनी ट्रैप गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. पावला बेलखेडा के दो सगे भाइयों को ईडब्ल्यूएस क्वार्टर शताब्दीपुरम बुलाकर न सिर्फ उनकी पिटाई कराई गई, बल्कि वीडियो बनाकर एक लाख रुपए वसूलने का दबाव बनाया गया. रकम न देने पर उन्हें दुष्कर्म के झूठे केस में फँसाने की धमकी दी गई. पूरे मामले में यादव कॉलोनी चौकी के कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनकी कॉल डिटेल्स और डायरी एंट्री की जांच शुरू हो चुकी है.
सीएसपी रितेश शिव ने बताया कि 19 वर्षीय युवक ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके बड़े पापा के लड़के की ‘रागिनी शर्मा’ नाम की इंस्टाग्राम आईडी से चैटिंग चल रही थी. दो दिन बाद युवती ने शुक्रवार दोपहर मिलने का संदेश भेजा. युवती मेहता पेट्रोल पंप के पास मिली और पहले 500 रुपए लेकर दोनों भाइयों को ईडब्ल्यूएस क्वार्टर ले गई। वहाँ पहुँचकर उसने चाइनीज भोजन, बीयर और सिगरेट मंगवाई। कुछ ही मिनट बाद उसने फोन कर अपने साथियों विवेक तिवारी और साहिल बर्मन को बुला लिया.
दोनों युवक कमरे में घुसे और भाइयों की पिटाई कर वीडियो बनाने लगे. इसके बाद आरोपियों ने कहा-
“एक लाख रुपए दो, वरना बलात्कार का केस दर्ज करवा देंगे. ”पीड़ित युवक घबरा गया और परिजनों को बुलाया. परिवार ने पैसे देने से साफ इंकार करते हुए थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई.
मामले को संदिग्ध बनाने वाला सबसे अहम पहलू यह है कि युवती द्वारा छेड़छाड़ का आरोप लगाने के सिर्फ दो मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुँच गई. पीड़ित का आरोप है कि इतनी तेज कार्रवाई तभी संभव है जब पुलिस को पहले से जानकारी हो या समन्वय हो. इसी वजह से चौकी पुलिस की भूमिका सवालों में है. उच्च अधिकारी अब यह जांच रहे हैं कि कहीं पुलिसकर्मियों की इस गैंग से मिलीभगत तो नहीं थी.
सीएसपी ने सौंपी एसपी को रिपोर्ट-
सीएसपी रितेश कुमार के मुताबिक, मामले की रिपोर्ट एसपी को सौंप दी गई है। रागिनी शर्मा, विवेक तिवारी और साहिल बर्मन के खिलाफ धारा 308(2), 61(2), 296, 115(2), 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर तीनों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि यह गिरोह पहले कितने युवकों को इसी तरह हनी ट्रैप में फंसा चुका है। सूत्रों के अनुसार, जांच में यदि पुलिसकर्मियों की संलिप्तता के प्रमाण मिले तो विभागीय कार्रवाई, निलंबन और आपराधिक प्रकरण तक दर्ज किए जा सकते हैं.



