IndiaJammu Kashmir

UAPA मामले में कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी दोषी करार, सजा पर 17 जनवरी को आएगा फैसला

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (14 जनवरी) को कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) मामले में दोषी करार दिया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदरजीत सिंह ने अंद्राबी को यूएपीए की धारा 18 (षड्यंत्र के लिए दंड) और 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) के तहत दोषी ठहराया है. उनकी सजा पर 17 जनवरी को फैसला किया जाएगा.

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अंद्राबी पर दो सहयोगियों के साथ मिलकर नफरत भरे भाषणों के माध्यम से भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए हैं.

सबूतों की जांच करने के बाद कोर्ट ने दोषी करार दिया

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अंद्राबी और उसके सहयोगी अलगाववादी आंदोलनों के लिए समर्थन जुटाने और प्रतिबंधित संगठनों से संबंध बनाए रखने में शामिल थे, ये ऐसे कार्य थे जो एजेंसी के अनुसार यूएपीए के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं. निचली अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों की जांच करने के बाद आरोपों को सही ठहराया और उसे दोषी ठहराया.

सजा पर 17 जनवरी आएगा फैसला

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदरजीत सिंह ने अंद्राबी को यूएपीए की धारा 18 (षड्यंत्र के लिए दंड) और 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) के तहत दोषी ठहराया है. अदालत ने कहा कि सजा की अवधि पर फैसला 17 जनवरी को किया जाएगा.

महिलाओं के अलगाववादी समूह की स्थापना

आंद्राबी ने 1987 में महिलाओं के अलगाववादी समूह ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ त (डीईएम) की स्थापना की थी. उन्हें अप्रैल 2018 में जम्मू और कश्मीर में अलगाववादी नेटवर्क पर व्यापक कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया था. बाद में संगठन पर UAPA के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया था.

यह दोषसिद्धि एक लंबे मुकदमे के बाद हुई है जिसमें एनआईए ने तर्क दिया कि अंद्राबी ने भाषणों, बैठकों और संगठनात्मक कार्यों के माध्यम से अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. फैसला सुनाए जाने के बाद, अदालत अब इस सप्ताह के अंत में सजा पर दलीलें सुनेगी और फिर यूएपीए के संबंधित प्रावधानों के तहत दी जाने वाली सजा का फैसला करेगी.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply