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रीवा में खाकी पर रिश्वतखोरी का आरोप! एफआईआर से नाम हटाने के बदले मांगे 20 हजार

रीवा : जिले के समान थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.एक ऑनलाइन दुकान संचालक ने पुलिसकर्मी पर एफआईआर में नाम न घसीटने के बदले 20,000 रुपये की रिश्वत मांगने का सनसनीखेज आरोप लगाया है.

पीड़ित का कहना है कि उसे डराया जा रहा है कि यदि पैसे नहीं दिए, तो उसे लूट के मामले में सह-आरोपी बना दिया जाएगा.

 

रतहरा निवासी विकास कुमार वर्मा, जो ‘विकास ऑनलाइन’ नाम से दुकान चलाते हैं, विकाश ने बताया कि बीती 2 मार्च को राज ठाकुर नामक एक युवक उनकी दुकान पर आया था.उसने गाड़ी की किस्त भरने का बहाना बनाकर विकास के ऑनलाइन स्कैनर पर 14,000 रुपये मंगवाए और कमीशन काटकर नकद राशि ले गया.

आरोप है कि कुछ दिनों बाद विकास को समान थाने से रविशंकर द्विवेदी नामक व्यक्ति का फोन आया और उन्हें थाने बुलाया गया.थाने पहुँचने पर पुलिस ने बताया कि उनके खाते में आए 14,000 रुपये लूट की राशि थी, जिसे राज ठाकुर ने पन्ना के एक युवक से चाकू की नोक पर लूटा था.

पीड़ित विकास का आरोप है कि थाने बुलाने के बाद उन्हें एकांत में ले जाकर सौदेबाजी की गई। आरोप के मुताबिक, रविशंकर द्विवेदी ने उनसे कहा कि यदि वे 20,000 रुपये देते हैं, तो उनका नाम केस डायरी और एफआईआर में नहीं आएगा। पैसे न देने पर उन्हें अपराधी के रूप में पेश करने की धमकी दी गई.

पीड़ित विकाश से मीडिया को बताया कि मेरी ऑनलाइन की दुकान है, मैंने सिर्फ ट्रांजैक्शन किया था.अब मुझे बार-बार फोन कर थाने बुलाया जा रहा है और पैसों के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मेरा परिवार दहशत में है.

यह मामला पुलिस की छवि पर गहरा दाग लगाता है। सवाल यह है कि क्या अब थानों तैनात पुलिस कर्मियों की हालत एक भिखारी से भी बदतर हो चुकी है क्या बिना रिश्वत लिए इनका चूल्हा नहीं जल रहा है अब क्या बेगुनाही साबित करने के लिए भी ‘रेट लिस्ट’ चलेगी क्या एक छोटा व्यापारी अपनी ईमानदारी की सेवा देने के बदले अब खाकी के डर के साये में जियेगा
फिलहाल, इस मामले में पुलिस के उच्च अधिकारियों का आधिकारिक बयान आना शेष है.देखना होगा कि क्या विभाग अपने कर्मचारियों पर लगे इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा.

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