
Prayahraj Railway News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक लोको पायलट की ‘नाराजगी’ ने रेलवे सिस्टम को हिलाकर रख दिया। ड्यूटी का समय खत्म होने और अतिरिक्त काम के दबाव के चलते पायलट ने बीच रास्ते में मालगाड़ी आगे ले जाने से इनकार कर दिया, जिससे घंटों तक आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ी।
यह घटना प्रयागराज के लालगोपालगंज रेलवे स्टेशन की है, जहाँ मंगलवार को ‘अप ऊंचाहार’ मालगाड़ी के लोको पायलट अमरनाथ ने अचानक ब्रेक लगा दिए। दरअसल, स्टेशन मास्टर ने लखनऊ इंटरसिटी को रास्ता देने के लिए मालगाड़ी को प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ा किया था। जैसे ही इंटरसिटी गुजरी और मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाई गई, पायलट ने ट्रेन चलाने से मना कर दिया।
‘9.5 घंटे काम कर चुका, अब और नहीं’
लोको पायलट का तर्क स्पष्ट था कि उसकी निर्धारित ड्यूटी 8 घंटे की है, जबकि वह पिछले 9 घंटे 30 मिनट से लगातार काम कर रहा था। पायलट का कहना था कि प्लेटफार्म पर रोके जाने से उसकी नाराजगी और बढ़ गई और अब वह थकावट के कारण ओवरटाइम करने की स्थिति में नहीं है। स्टेशन मास्टर ने कंट्रोल के निर्देश पर उसे ‘9+2’ घंटे कार्य करने का मेमो भी सौंपा, लेकिन पायलट टस से मस नहीं हुआ।
फाटक बंद और सवा घंटे का भीषण जाम
ट्रेन के बीच पटरी पर खड़े होने के कारण जेठवारा मार्ग स्थित पश्चिमी रेलवे क्रॉसिंग का फाटक करीब 1 घंटा 17 मिनट तक गिरा रहा। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और भीषण ठंड में राहगीर जाम में फंसे रहे। लोग हॉर्न बजाते रहे, लेकिन पायलट अपनी जिद पर अड़ा रहा और इंजन खामोश रहा।
पुलिस और अफसरों की मान-मनौव्वल
स्टेशन पर अफरातफरी मचने पर कुंडा से (RPF) और स्थानीय पुलिस बुलाई गई। पुलिसकर्मियों ने पायलट से मिन्नतें कीं और थोड़ा रौब भी दिखाया, लेकिन ‘नाराज’ पायलट का दिल नहीं पसीजा। अंततः, यातायात निरीक्षक और के हस्तक्षेप और लंबी मान-मनौव्वल के बाद दोपहर करीब 12:43 बजे मालगाड़ी रवाना हुई, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका।
सुरक्षा पर सवाल और जांच के आदेश
इस घटना ने रेलवे की कार्यप्रणाली और लोको पायलटों पर काम के बोझ को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी ने कहा कि यह तरीका गलत है और मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। डीआरएम लखनऊ सुनील कुमार वर्मा ने भी स्पष्ट किया है कि परिस्थितियों और बयानों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।



