
लखनऊ। प्रदेश में स्लीपर और ठेका बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। जो बसें सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगी, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी और जरूरत पड़ने पर बस को जब्त भी किया जाएगा। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने इस संबंध में प्रदेश के सभी परिवहन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज एक मामले में यह निर्देश जारी किए गए हैं। अब प्रदेश में चल रही सभी स्लीपर बसों में तय सुरक्षा मानकों को तुरंत लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है।
केंद्रीय सड़क अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा बताए गए सभी सुरक्षा उपायों का पालन कराया जाएगा। सभी स्लीपर बसों को बुलाकर चालक के केबिन में लगा विभाजन द्वार हटवाया जाएगा। इसके साथ ही बसों की सभी बर्थ में लगे स्लाइडर भी तुरंत हटाने के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि ये हादसे की स्थिति में यात्रियों के लिए खतरा बन सकते हैं। हर स्लीपर बस में अग्निशमन यंत्र लगाना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
बस संचालकों को इसके लिए एक माह का समय दिया गया है। हर बस में कम से कम दस किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र होना जरूरी होगा और उसकी नियमित जांच भी करानी होगी। जिन बसों की बॉडी चेसिस से तय सीमा से अधिक बढ़ाई गई है, उन्हें तुरंत सड़क से हटा दिया जाएगा। अब सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण केवल निर्धारित प्रपत्र 22 और 22ए पर ही होगा।
पंजीकरण से पहले मान्यता प्राप्त परीक्षण एजेंसी की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के समय बस का पूरा लेआउट ड्राइंग देना होगा, जिसमें माप, दरवाजों की स्थिति, आपातकालीन निकास और छत पर बने हैच का पूरा विवरण शामिल रहेगा। साथ ही बस बाडी निर्माता की मान्यता की वैधता भी जांची जाएगी। इसकी रिपोर्ट संभागीय परिवहन अधिकारियों को हर हाल में शुक्रवार तक परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजनी होगी।



